राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के नेता ने शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव को सौंपा ज्ञापन
आजमगढ़: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव और आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव को सोमवार को होटल फॉर्च्यून में पांच सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन देने के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए आरयूसी के प्रदेश अध्यक्ष यूथ नुरूल हुदा ने मुस्लिम पिछड़ी और दलित जातियों के शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आजादी के करीब 80 वर्ष बाद भी अनेक मुस्लिम जातियां मूलभूत अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी से वंचित हैं। नुरूल हुदा ने कहा कि ओबीसी मुस्लिम जातियों और मुस्लिम दलित जातियों को लंबे समय से वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया जाता रहा है, लेकिन उनके सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और राजनीतिक विकास के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं हुए। उन्होंने कुरैशी, मंसूरी, बहेलिया, जुलाहा, ढफाली, मुस्लिम माली, बख्खो, दर्जी, गौरी, भाट, रंगरेज, तेली, चिकवा, पमरिया, नट, कोईरी और इराकी सहित अन्य मुस्लिम जातियों को राजनीतिक एवं संवैधानिक अधिकारों में उचित भागीदारी दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की 2006 की रिपोर्ट, रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट तथा मंडल आयोग की सिफारिशों में पिछड़े और वंचित वर्गों की स्थिति पर चर्चा की गई है। नुरूल हुदा ने कहा कि मुस्लिम समाज की जिन जातियों को अभी तक ओबीसी सूची में शामिल नहीं किया गया है, उन्हें सूची में शामिल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अनेक मुस्लिम पिछड़ी जातियों का विधानसभा, विधान परिषद और संसद में प्रतिनिधित्व बेहद सीमित रहा है। कई जातियों की स्थानीय निकायों में भी राजनीतिक भागीदारी नहीं हो सकी है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित सभी सेक्युलर दलों से इस समाज की राजनीतिक भागीदारी और संवैधानिक अधिकारों के सवाल पर गंभीरता से पहल करने की मांग की। नुरूल हुदा ने कहा कि यदि राजनीतिक दल इस मुद्दे पर गंभीरता से पहल नहीं करते हैं तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से लेकर विधानसभा और संसद तक अपनी आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि संगठन राजनीतिक दलों और नेताओं से यह सवाल पूछता रहेगा कि वंचित मुस्लिम जातियों को न्याय और राजनीतिक भागीदारी कब मिलेगी। ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 341(3) में 10 अगस्त 1950 से लागू धार्मिक प्रतिबंध हटाने, मुस्लिम दलित जातियों के शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक विकास के लिए ‘अरजाल आयोग’ गठित करने, मुस्लिम पवरिया/पमरिया समेत अन्य छूटी हुई जातियों को उत्तर प्रदेश की ओबीसी सूची में शामिल करने, बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश की अन्य पिछड़ा वर्ग सूची में कर्पूरी फार्मूला लागू करने तथा 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण में से 8.44 प्रतिशत मुस्लिम ओबीसी कोटा अलग करने की मांग की गई है।
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