वर्ष 2011 के उपचुनाव और 2017 के आम चुनाव में शहर की जनता ने चुना था अपना प्रतिनिधि
पति गिरीश चंद्र श्रीवास्तव भी दो बार संभाल चुके थे चेयरमैन पद की जिम्मेदारी
आजमगढ़: नगर पालिका परिषद की दो बार चेयरमैन रहीं शीला श्रीवास्तव का मंगलवार की सुबह लखनऊ स्थित आवास पर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर शहर में पहुंचने पर समर्थक शोक में डूब गए। उनका शव लखनऊ से शहर स्थित कुर्मीटोला आवास पर लाया गया जहां परिवार से जुड़े लोगों व समर्थकों ने उनका अंतिम दर्शन किया। उसके बाद शुरू हुई शवयात्रा नगर पालिका परिसर पहुंची जहां चेयरमैन समेत सभासदों व कर्मचारियों ने शव पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहां से शवयात्रा तमसा नदी किनारे राजघाट पहुंची जहां दाह संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके इकलौते पुत्र प्रणीत श्रीवास्तव उर्फ हनी ने दी। शीला श्रीवास्तव को उनके अध्यक्ष पति गिरीश चंद्र श्रीवास्तव के असामयिक निधन के बाद वर्ष 2011 में हुए उपचुनाव में विजय मिली थी, लेकिन 2012 के आम चुनाव में वह भाजपा प्रत्याशी इंदिरा देवी जयसवाल से हार गई थीं। उसके बाद 2017 के आम चुनाव में जनता ने उन्हें एक बार फिर मौका दिया। फिर 2022 के चुनाव में उन्होंने किन्हीं कारणों से चुनाव से दूरी बना ली। फिर अधिकतर समय लखनऊ स्थित आवास पर रहने लगीं थीं। उनके एक पुत्र व दो पुत्रियां हैं। दोनों बड़ी पुत्रियों की शादी हो चुकी है। महत्वपूर्ण यह कि कभी पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रजीत यादव के करीबी रहे उनके पति गिरीशचंद्र श्रीवास्तव शहर के काफी लोकप्रिय व्यक्तियों में गिने जाते थे। यही कारण था कि 1985 से वर्ष 2000 तक कुर्मीटोला-मातवरगंज वार्ड के सभासद की जिम्मेदारी संभाली। फिर अपने लोगों की सलाह पर वर्ष 2000 में कांग्रेस के सिंबल पर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़े और पहली ही बार में सफलता प्राप्त की। 2006 में कांग्रेस ने सिंबल छीन लिया, तो निर्दल प्रत्याशी के रूप में गैस का चूल्हा चुनाव निशान लेकर मैदान में उतरे और अध्यक्ष पद की दूसरी पारी शुरू की। बीमारी के दौरान 12 जून 2010 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन के बाद जनवरी 2011 में उपचुनाव हुआ तो शहर की जनता ने गिरीश को श्रद्धांजलि स्वरूप शीला के पक्ष में मतदान कर पहली बार नगर पालिका का अध्यक्ष बना दिया था।
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