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आजमगढ़: विदेश भेजने के नाम पर साइबर ठगी करने वाला गिरफ्तार


फर्जी मालदीव वर्क परमिट बरामद, मजदूरों को बनाता था शिकार

आजमगढ़: विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले एक युवक को साइबर सेल और सिधारी पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से दो फर्जी मालदीव वर्क परमिट, एक मोबाइल फोन, आधार कार्ड, नकदी और घटना में प्रयुक्त प्लेटिना बाइक बरामद की गई है। जांच में पता चला कि आरोपी इंटरनेट से मालदीव के मूल वर्क परमिट का प्रारूप डाउनलोड कर उसमें एडिटिंग के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये वसूलता था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान "साइबर ठगी के जड़ में वार" के तहत अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) चिराग जैन, अपर पुलिस अधीक्षक (यातायात) पंकज श्रीवास्तव तथा क्षेत्राधिकारी नगर के निर्देशन में प्रभारी साइबर सेल उपनिरीक्षक रवि प्रकाश गौतम के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। प्रतिबिंब पोर्टल पर संदिग्ध बैंक खातों और एटीएम हॉटस्पॉट की जांच के दौरान मुखबिर से सूचना मिलने पर पुलिस ने छतवारा स्थित यादव ढाबा के पास घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। भागने का प्रयास करने पर पुलिस ने उसे दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुकेश यादव पुत्र चन्द्र भूषण यादव, निवासी हैदराबाद (छतवारा), थाना सिधारी, जनपद आजमगढ़ के रूप में हुई है। उसके कब्जे से दो कूटरचित मालदीव वर्क परमिट, एक सैमसंग मोबाइल फोन, आधार कार्ड, 200 रुपये नकद तथा प्लेटिना मोटरसाइकिल (यूपी-50 वी-3176) बरामद हुई, जिसे मोटर वाहन अधिनियम के तहत सीज कर दिया गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह इंटरनेट से मालदीव के वर्क परमिट का मूल प्रारूप डाउनलोड कर अपने मोबाइल में रखता था और उसमें अलग-अलग व्यक्तियों का नाम व विवरण जोड़कर फर्जी वर्क परमिट तैयार करता था। इसके बाद वह व्हाट्सएप या प्रिंट कॉपी के माध्यम से दस्तावेज भेजकर लोगों से किस्तों में धनराशि लेता था। मोबाइल की जांच में मालदीव के आर्थिक विकास मंत्रालय के वर्क परमिट का टेम्पलेट भी मिला है, जिसका इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज बनाने में किया जाता था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले मुंबई में मर्चेंट नेवी से जुड़े कार्य में था। वहीं उसकी पहचान विभिन्न राज्यों के ऐसे श्रमिकों से हुई थी जो विदेश में रोजगार की तलाश में थे। आरोपी ने इन्हीं पुराने संपर्कों का फायदा उठाते हुए खुद को विदेश में नौकरी और वीजा उपलब्ध कराने वाला एजेंट बताकर लोगों का विश्वास जीता और मालदीव सहित अन्य देशों में आकर्षक वेतन वाली नौकरी का लालच देकर ठगी करता रहा। जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी ने अपनी भाभी के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर यूनियन बैंक में खाता खुलवाया था। समन्वय पोर्टल की जांच में इस खाते से जुड़ी पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति की शिकायत मिली, जिसमें विदेश भेजने के नाम पर 21 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी का मामला दर्ज था। आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने शिकायतकर्ता से कुल 35 हजार रुपये में विदेश भेजने का सौदा किया था, जिसमें 21 हजार रुपये प्राप्त कर फर्जी वर्क परमिट उपलब्ध कराया था। पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही उसके अन्य पीड़ितों, बैंक खातों, सहयोगियों और पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच जारी है।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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