सहभागिता योजना से गौ संरक्षण बना जनआंदोलन, 50 रुपये प्रतिदिन भरण-पोषण से बढ़ रही गौपालकों की आय
आजमगढ़: उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल एवं सदस्य दीपक गोयल ने दो दिवसीय जनपद भ्रमण के दौरान विभिन्न गौ-आश्रय स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद कलेक्ट्रेट सभागार में गोवंश संरक्षण एवं अनुश्रवण समिति की बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और सुधारात्मक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अतरौलिया के मकरहा, अहरौला के बस्ती भुजवल, कोयलसा के कोटवा जलाल तथा बिलरियागंज के गदनुपर हिछनपट्टी स्थित गौ-आश्रय स्थलों का जायजा लिया गया। यहां टीन शेड, पेयजल, हरा चारा, छायादार व्यवस्था और साफ-सफाई की स्थिति पर अधिकारियों व कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में उपाध्यक्ष ने कहा कि सड़कों व खेतों में घूम रहे निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय स्थलों में रखा जाए तथा मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत अधिक से अधिक लोगों को जोड़कर “एक व्यक्ति-एक गोवंश” अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने चारागाह भूमि पर हरा चारा उत्पादन बढ़ाने, छोटे आश्रय स्थलों के विस्तार और बड़े केंद्रों में स्थानांतरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया। उपाध्यक्ष ने निर्देश दिया कि गो-आश्रय स्थलों पर कार्यरत कर्मियों का मानदेय समय से दिया जाए और इसे मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप रखा जाए। साथ ही नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी। गर्मी को देखते हुए गोवंशों के लिए विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए गए। टिन शेड पर पुआल डालने, स्वच्छ पेयजल और छाया की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। हाईवे पर दुर्घटनाग्रस्त पशुओं को तत्काल निकटतम आश्रय स्थल में पहुंचाने तथा सुरक्षा के लिए पुलिस द्वारा नियमित निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए। उपाध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा गौ संरक्षण के लिए बहुआयामी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में 7,700 से अधिक गौ-आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। सरकार प्रत्येक गोवंश के भरण-पोषण के लिए 50 रुपये प्रतिदिन की दर से सहायता दे रही है। उन्होंने बताया कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 5,446 गौशालाओं में 7,592 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित हो रही है। सहभागिता योजना के तहत अब तक 1,67,065 गोवंश गौपालकों को सौंपे जा चुके हैं, जिससे न केवल संरक्षण को बढ़ावा मिला है बल्कि ग्रामीणों की आय में भी वृद्धि हुई है। जनपद में भी गौ संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो रहा है। वर्तमान में 92 गौ-आश्रय स्थलों में 9050 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि 1357 गौपालकों ने 2253 गोवंश को अपनाकर सहभागिता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना ने आश्वस्त किया कि सभी निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन कराया जाएगा। इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन, अपर जिलाधिकारी (वि/रा) गम्भीर सिंह, परियोजना निदेशक सच्चिदानंद प्रसाद, डीसी मनरेगा राम उदरेज यादव, पशु चिकित्साधिकारी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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