मरीजों से संवाद किया, दवा बाहर से लिखने पर जांच के आदेश; सीटी स्कैन सेवाएं बढ़ाने का दिया लक्ष्य
आजमगढ़: जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने सोमवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत परखी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ओपीडी में पहुंचे मरीजों से सीधे बातचीत कर इलाज और सुविधाओं की जानकारी ली तथा व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सख्त निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान डीएम ने आयुष्मान भारत कक्ष, दवा वितरण कक्ष, ईएनटी विभाग, मॉड्यूलर भवन, सीटी स्कैन व एमआरआई कक्ष, पैथोलॉजी, ब्लड बैंक और ब्लड कलेक्शन रूम का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि मरीजों को बेहतर और समयबद्ध सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। डीएम ने रजिस्ट्रेशन काउंटर पर आभा रजिस्ट्रेशन के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश दिए, ताकि मरीजों को लंबा इंतजार न करना पड़े। वहीं आयुष्मान ओपीडी कक्ष के बाहर योजना से संबंधित जानकारी बड़े और स्पष्ट अक्षरों में प्रदर्शित करने को कहा। निरीक्षण के दौरान एनसीडी क्लीनिक के बाहर बैठे मरीजों ने डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवाएं लिखे जाने की शिकायत की। इस पर डीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए पिछले एक माह की पर्चियों की जांच के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए। समिति में मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन एक अपर मुख्य चिकित्साधिकारी और एक चिकित्सक शामिल होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यक दवाएं अस्पताल से ही उपलब्ध कराई जाएं, अन्यथा संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सीटी स्कैन सेवाओं की समीक्षा के दौरान डीएम ने दोनों मशीनों को नियमित रूप से संचालित रखने का निर्देश दिया। सीएसआर फंड से मिली मशीन से प्रतिदिन मात्र 5-6 स्कैन होने पर उन्होंने असंतोष जताते हुए इसे बढ़ाकर 50 प्रतिदिन करने का लक्ष्य तय किया। साथ ही सीटी स्कैन फिल्म की कमी दूर करने के लिए शासन को जल्द मांग पत्र भेजने को कहा। निरीक्षण के बाद डीएम ने अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन ब्लड बैंक के नए भवन का भी जायजा लिया। उन्होंने ब्लड डोनर के लिए लगाए जा रहे 10 काउच का निरीक्षण करते हुए कार्यदायी संस्था को गुणवत्ता से समझौता न करने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने निर्देश दिया कि अप्रैल माह के अंत तक निर्माण कार्य पूरा कर भवन का हैंडओवर सुनिश्चित किया जाए। डीएम ने दो टूक कहा कि आमजन को सुलभ, बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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