पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर हड़ताल पर रहे
आजमगढ़: आज दिनांक 27 जनवरी 26 को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर पांच दिवसीय सप्ताह लागू न करने को लेकर बैंकों की सभी यूनियनों के सदस्य हड़ताल पर चले गए, इस हड़ताल से सभी राष्ट्रीयकृत, ग्रामीण, सहकारी एवं देशी/विदेशी प्राइवेट बैंक भी प्रभावित रहे और उनके ताले नही खुले। शहर के सभी बैंकों के कर्मचारी/अधिकारी मुख्य रूप से स्टेट बैंक की रैदोपुर शाखा पर एकत्रित होकर एक विशाल धरने/प्रदर्शन में शामिल हुए। इसमें कई बैंक यूनियन के नेतृत्व के साथियों ने वहां उपस्थित बैंक कर्मी एवं अन्य खाताधारकों को आज की इस हड़ताल के कारणों पर विस्तृत प्रकाश डाला। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के कन्वेनर विष्णु गुप्ता ने कहा कि आज भारत युवाओं का देश है और हम इस पर अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं और यही बात हमें विश्व में अन्य से मीलों आगे ले जाती है। युवा जहां रोजगार चाहता है वहीं वर्क लाइफ बैलेंस भी चाहता है, आज नया जमाना है बातें नई हैं,संयुक्त परिवार का चलन जब से कम हुआ, तबसे पति पत्नी दोनों को काम चाहिए और उन परिस्थितियों में उन्हें काम के बीच में ब्रेक भी चाहिए, वैज्ञानिक अध्ययनों में भी पाया गया कि दो दिन के साप्ताहिक अवकाश से जहां स्वास्थ्य अच्छा होता है वहीं कार्य के गुणों एवं उत्पादन में बढ़ोत्तरी होती है। स्टेट बैंक के साथी अमित सिंह के विचार थे कि आज हमारे बैंक विश्व के उन्नत बैंकों की बराबरी कर रहे हैं, हमारे अनेक प्रोडक्ट विश्व के नामी बैंकों के बराबरी के उनसे उन्नत हैं पर क्या हमारी व्यवस्था एवं कार्य करने की दशा बराबर है, एकदम नही है। आज देश ने प्रद्योगिकी में इतनी तरक्की की है जैसे कोर बैंकिंग सलयूशन,नेट बैंकिंग, टेले बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग,कियोस्क बैंकिंग, ऐनी टाइम ऐनी व्हेयर बैंकिंग और बैंकिंग के रोजमर्रा में आने वाले मशीन जैसे कैश डिस्पेंसर रिसाइकलर मशीन,मार्च 2019 की संख्या अनुसार 221703 एटीएम का पूरे भारत में जाल,4.25 मिलियन माइक्रो एटीम(पीओएस), 50.3 मिलियन क्रेडिट कार्ड, 840.6 मिलियन डेबिट कार्ड, 627 मिलियन इंटरनेट यूजर, 6.2 बिलियन मोबाईल बैंकिंग यूजर यानि शनिवार को कार्य करने की क्या आवश्यकता है,अतः सरकार को तुरंत पांच दिवसीय सप्ताह लागू करना चाहिए। इसी क्रम में बैंक ऑफ बडौदा के जनार्दन कुमार ने कहा कि सदी पहले सन 1817 में एक रोजगारी एवं मजदूर नेता रॉबर्ट ओवन ने कहा था काम के,आराम के या मनोरंजन के घंटे हो आठ। इसी प्रकार कोलकाता के रेलवे मजदूरों ने 1862 में आठ घंटे काम की वकालत की और इसी प्रकार साप्ताहिक अवकाश के दो दिन की शुरूआत कोई नया फार्मूला नहीं बल्कि जांचा परखा और आजमाया हुआ है और इसकी शुरूआत फोर्ड मोटर कंपनी ने वर्षों पहले वर्ष 1926 से ही शुरू कर दी थी।केनरा बैंक के दुर्गेश का कहना था कि 25 मई 2015 को ही उस समय की स्टेट बैंक की चेयरपर्सन श्रीमती अरुंधति भट्टाचार्य जो दसवां वेतन समझौते के लिए वित्त मंत्रालय से विशेष तौर पर भेजी गई थी, ने कहा था कि यदि दो शनिवार की बंदी कारगर रही तो सरकार सभी शनिवार को छुट्टी रखेगी, ये दावे कहां गए, इसी प्रकार ग्यारहवें वेतन समझौता जो वर्ष 2023 में हुआ उसमें सरकार एवं यूनियनों के बीच पांच दिवसीय बैंकिंग पर सहमति बनी और वही समझौता मार्च 2024 में हस्ताक्षरित हुआ, उसमें साफ साफ सहमति बनी कि कर्मचारी/अधिकारी चालीस मिनट अतिरिक्त काम करेंगे और सरकार पांच दिवसीय बैंकिंग को हरि झंडी दिखाते हुए लागू कर देगी पर ये सरकार की तरफ से एक धोखा एवं छल ही साबित हुआ।इसी क्रम में बैंकवार जैसे यूनियन बैंक से रिज़वान अहमद, धीरज चौधरी,विकास सिंह, योगेंद्र यादव स्टेट बैंक से बैंक आफ बडौदा से सरफराज केनरा बैंक से अश्वनी यूको बैंक से आदि सैकड़ों बैंक कर्मचारी/अधिकारी कर्मियों ने अपने अपने विचार रखे एवं विशाल धरना प्रदर्शन में भाग लिया। धरने के बीच में हड़ताली साथियों ने एक दो पहिया वाहन जुलूस स्टेट बैंक से होते हुए, दुर्गा मंदिर रैदोपुर, एक्सिस बैंक, एलवल त्रिमुहानी, HDFC बैंक से होते हुए शहीद द्वार, अग्रसेन तिराहा, सिविल लाइन चौराहा से होते हुए वापस स्टेट बैंक पर एक धरने के रूप में पुनः परिवर्तित हो गया जो शाम तक चला।
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