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आजमगढ़: पारंपरिक मराठी वेशभूषा और ढोल की थापों के बीच विदा हुए गणपति



शोभायात्रा में ' गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ' का नारा गूंजता रहा

महाराष्ट्र से बुलाई गई ढोल बैंड पार्टी आकर्षण का केंद्र रही
आजमगढ़: महाराष्ट्र की वेशभूषा में वहां से बुलाई गई 50 सदस्यों की ढोल बैंड पार्टी की टोली द्वारा बजाए जा रहे धुन और गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ की गूंज सुनकर हर कोई घरों से बाहर निकलकर विघ्न विनाशक का दर्शन-पूजन कर प्रसाद लिया और मंगलमय जीवन की कामना की।
मौका था शहर के दामोदर कटरा में आयोजित सात दिवसीय गणेशोत्सव के बाद प्रतिमा विसर्जन का। विसर्जन से पूर्व शहर में शोभायात्रा निकाली गई। विसर्जन शोभा यात्रा जिस रास्ते से गुजर रही थी वहां लोग घरों से बाहर निकलकर दर्शन-पूजन और प्रसाद प्राप्त कर रहे थे। रास्ते में भक्तों के लिए जलपान की भी व्यवस्था की गई थी। महाराष्ट्र के बड़े पर्व के रूप में माना जाने वाला गणेश उत्सव इस शहर में भी सात दिनों तक श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। शहर में रहने वाले मराठा समाज के लोगों ने इस वर्ष भी सात दिन पहले दामोदर कटरा में भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा स्थापित की थी। यहां सुबह-शाम यहां हवन-पूजन आदि कर रहे थे। इसके अलावा मराठा समाज के लोगों ने अपने घरों में भी प्रतिमाएं स्थापित कर रखी थीं। आखिरी दिन मराठा समाज के लोग अठवरिया मैदान में एकत्र हुए। वहां एक वाहन पर बड़ी प्रतिमा तो उसके पीछे के वाहन पर घरों में स्थापित प्रतिमाओं को रखा गया था। उसके बाद विसर्जन आरती और प्रसाद वितरण के बाद विसर्जन शोभायात्रा शुरू हुई।
प्रतिमाओं के आगे बैंड पार्टी और उस पर झूमते भक्त चल रहे थे, तो उसके पीछे महिला, पुरुष, बूढ़े बच्चे बल, बुद्धि रिद्धि-सिद्धि के लिए प्रार्थना कर रहे थे। अठवरिया मैदान से शुरू शोभायात्रा पुरानी सब्जीमंडी, मातबरगंज, चौक, पुरानी कोतवाली, दलालघाट होते हुए गौरीशंकर घाट पहुंची जहां तमसा नदी के गौरीशंकर घाट पर प्रतिमा को विसर्जित कर दिया गया।
- बन गई। ढोल उठाने से पहले टीम की ओर से शिवलिंग आकार की पूजा और नारियल फोड़े गए और उसके बाद पारंपरिक वेशभूषा में टीम ने ढोल बैंड उठाया। टीम में महिला कलाकार भी शामिल थीं।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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