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आजमगढ़: 'आयुष्मान’ से हारा ‘कैंसर’, तारिक की जिंदगी में लौटी खुशियां

मरीज तारिक के साथ डा० मनीष त्रिपाठी

शुरु में ही सटीक इलाज मिलता तो नहीं होती परेशानी - डा. मनीष त्रिपाठी

आयुष्मान कार्ड के चलते इलाज में खर्च 01.70 लाख रुपये सरकार ने दिए

आजमगढ़ : मऊ जिले के मोहल्ला पूरा गुलाब राय निवासी तारिक के जिंदगी की गाड़ी तंदूर रोटी बनाने से सरपट दौड़ रही थी। करीब सात माह पूर्व पैर में दर्द शुरू हुआ तो परिचित डाक्टरों से दवाएं ली, लेकिन राहत नहीं मिली। वाराणसी में एक डाक्टर को दिखाया, तो उन्होंने प्लास्टर बांध दिया। 45 दिन बाद खुला तो समस्या जस की तस होने से पैर का दर्द हंसती-खेलती जिंदगी में नासूर महसूस होने लगा। इसी बीच बाइक चलाने के दौरान एक पखवाड़ा पूर्व अप्रत्याशित रूप से पैर टूट गया।
वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. मनीष त्रिपाठी को दिखाया तो पता चला कि पैर में एक तरह का कैंसर हो गया है। इलाज में लाखों के खर्च की आशंका हुई, तो आयुष्मान कार्ड की याद आई। डाक्टर ने आपरेशन कर एक सप्ताह इलाज किया तो जिंदगी की गाड़ी फिर से पटरी पर आ गई। इलाज में खर्च एक लाख 70 हजार रुपये भी सरकार ने दिए। ऐसे में खुशियां लौटने से तारिक अब फिर से जिंदगी का ताना-बाना बुनने में जुट गए हैं।
वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. मनीष त्रिपाठी ने बताया कि हड्डी के दर्द की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। तारिक ने अनदेखी तो नहीं की, लेकिन यह जरूर कह सकता हूं कि सटीक इलाज नहीं मिल पाया। दर्द की दवाएं खाने से पैर कमजोर होने के साथ हड्डी गलने लगी थी, जिसके कारण ही टूट गई। मैंने बेहतर इलाज देने की कोशिश की, लेकिन हौसला तारिक ने जरूर रखा। उसने आयुष्मान कार्ड से कैंसर को हरा दिया। यह जरूर है कि तारिक और विलंब से मेरे पास आते तो मुश्किलें हद से गुजरने वाली हो सकती थीं।
डा० त्रिपाठी ने आम लोगों को सलाह दी की अगर शरीर के हिस्से में बिना चोट के तेज दर्द हो
या शरीर के किसी एक हिस्से का तापमान बढ़ा दिखे तो चिकित्सक को जरूर मिलें।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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