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आजमगढ़: 'शेर' से शुरू हुआ था सफर,अब 'दुर्गविजय' बने दुर्गा प्रसाद यादव


नौवीं बार रोमांचक संघर्ष में जीते दुर्गा प्रसाद,अखिलेश मिश्र ने भी लोगों का दिल जीता

आजमगढ़: यूं तो सपा की साइकिल की चाल दसाें विधानसभा सीट पर मदमस्त रही, लेकिन लड़ाई का असली रोमांच तो आजमगढ़ सदर में ही दिखा। नौवीं बार कांटे की संघर्ष में जीत दर्ज कर दुर्गा प्रसाद यादव ‘दुर्ग विजय’ बने, तो हारकर भी भाजपा के अखिलेश कुमार मिश्र ने दिल जीतने में कोई कसर नहीं रखी। दरअसल, 18वें राउंड में दोनों प्रत्याशियों में वोटों का अंतर 900 तक आ पहुंचने से कशमकश की स्थिति आ गई, लेकिन उसके बाद बढ़ना शुरू हुए तो जीतने के बाद ही दुर्गा यादव के कदम थमे।
दुर्गा शुरू से ही सियासी सोच रखने के कारण पल्हनी ब्लाक से चुनाव लड़कर प्रमुख बने। उस सीट को फिलहाल उनके भतीजे प्रमोद यादव संभाल रहे हैं। सन् 1984 में जेल में रहते हुए माननीय बनने के लिए आजमगढ़ सदर से मैदान में उतरे। चुनाव चिह्न मिला था शेर, जो खासा चर्चा में रहा और जीत भी गए। उसके बाद से अनवरत चुनावी मैदान में उतरते रहे, लेकिन सिर्फ एक बार शिकस्त खाए। अबकी लड़ाई उनके लिए कांटे की हुई तो रणनीति से लड़े 01 लाख 313 वोट पाकर अजेय बने रहे। अंतिम चक्र के बाद अखिलेश मिश्र 84770 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। 16036 मतों के अंतर से दुर्गा यादव की जीत हुई।
वर्ष 2017 में दुर्गा 88087 वोट पाकर 26262 वोट से जीते थे। उस समय अखिलेश मिश्र गुड्डू 61825 वोट पाए थे। वर्ष 2012 में भाजपा 8577 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रही थी। अखिलेश ने आस जगाई तो उनके ऊपर पार्टी ने फिर से भरोसा जताया तो 84770 वोट पाकर भी जीत से दूर रह गए। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा की रही तो जनता में भी इस विधानसभा सीट का रुझान जानने में दिलचस्पी देखने को मिली। सुबह से ही मतगणना शुरू होते ही सभी लोग एक-एक चक्र के परिणाम पर नजर बनाए रहे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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