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आजमगढ़: मेडिकल कालेज को यूनिसेफ ने डोनेट की आरटीपीसीआर मशीन 


माइक्रोबायोलाजी विभाग में पहले से हैं 03 मशीनें, मंडल में बढ़ गई जांच की क्षमता

आजमगढ़: राजकीय मेडिकल कालेज व सुपर फैसिलिटी अस्पताल के माइक्रोबायोलाजी विभाग में कोरोना संक्रमण की जांच के लिए यूनिसेफ (यूनाइटेड नेशन्स इंटरनेशनल इमेरजेंसी चिल्ड्रेंस फंड्स) ने एक आरटी पीसीआर मशीन डोनेट की है। इससे पहले माइक्रोबायोलाजी विभाग में तीन आरटी पीसीआर मशीन थी। एक मशीन बढ़ने से जांच क्षमता में तो वृद्धि हुई है। परंतु जांच सैंपल आने में कमी हुई है। इसका कारण यह है कि पहले माइक्रोबायोलाजी विभाग में मंडल के तीनों जिलों के लोगों की कोरोना संक्रमण की जांच होती थी परंतु बाद में बलिया जनपद के लोगों की जांच उनके जिले में ही होने लगी। अब इधर मऊ जनपद के लोगों की भी जांच स्वयं उनके जिले में होने लगी है। हांलांकि विगत कुछ माह से कोरोना संक्रमण में निरंतर आई कमी के कारण जांच सैंपल कम आ रहे हैं। लेकिन संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर अब जांच के लिए जनपद वासियों को काफी राहत मिलेगी। राजकीय मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलाजी विभाग में प्रातः 9:00 बजे से रात 2:00 बजे तक तीन शिफ्ट में कोरोनावायरस के संक्रमण की जांच होती है। वहीं ‌रिपोर्ट आने में 4 से 6 घंटे का समय लगता है। माइक्रोबायोलाजी विभाग की विभागाध्यक्ष डाक्टर प्रतीक्षा श्रीवास्तव ने बताया कि चार मशीन होने से अब प्रतिदिन के हिसाब से चार से छः हजार लोगों के सैंपल की जांच हो सकेगी। जबकि अभी प्रतिदिन 12 सौ से 15 सौ लोगों के ही कोरोना संक्रमण की जांच हो रही है। इसका कारण पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि पहले मंडल के तीनों जिलों के लोगों की कोरोना संक्रमण की जांच होती थी। परंतु पहले बलिया जनपद में खुद की जांच सुविधा होने से वहां का सैंपल आना बंद हो गया। अब इधर मऊ जनपद में भी जांच सुविधा होने से वहां का सैंपल आना बंद हो गया। उन्होंने बताया कि सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की है। ताकि कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से आसानी से निपटा जा सके।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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