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आज़मगढ़: मूल मंत्र है 'जल संरक्षण है संकल्प, नहीं है इसका कोई विकल्प' - इं० कुलभूषण


जिला विज्ञान क्लब ने भूजल सप्ताह में ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की 

2030 तक भारत में जल की मांग के मुकाबले सप्लाई आधी रह जाएगी 

आजमगढ़ 19 जुलाई-- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश के अंतर्गत जिला विज्ञान क्लब आजमगढ़ के तत्वाधान में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित भूजल सप्ताह 16 जुलाई से 12 जुलाई के क्रम में ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें राजकीय पॉलिटेक्निक के छात्रों एवं कई स्कूलों के छात्रों ने भाग लिया। कार्यशाला में जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने छात्रों को जल संरक्षण के विषय में वीडियो और स्लाइड के माध्यम से विस्तार से बताया। उन्होने बताया कि 2021 की भूजल सप्ताह की थीम है, जल संरक्षण है संकल्प नहीं है इसका कोई विकल्प। पृथ्वी पर कुल उपलब्ध जल का 97 प्रतिशत जल खारा पानी है, मात्र 3 प्रतिशत जल ही उपयोग के लिए उपलब्ध है। इस 3 प्रतिशत जल का मात्र 30 प्रतिशत जल भूजल के रूप में उपलब्ध है, इस सीमित भूजल के असिमित दोहन से तथा केवल 8 प्रतिशत वर्षा जल का ही भूजल रिचार्ज के रूप में उपयोग होने से भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। दुनिया की कुल आबादी में भारत की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत है, जबकि दुनिया में कुल उपलब्ध जल में भारत के हिस्से में सिर्फ 4 प्रतिशत जल ही है। 2030 तक भारत में जल की मांग के मुकाबले सप्लाई आधी रह जाएगी, देश में कई शहरों में पानी की भारी कमी, जैसे चेन्नई, हैदराबाद इत्यादि के वजह से कई बड़ी कंपनियां अपना कारोबार समेट रही हैं। नीति आयोग के अनुमान के अनुसार जल संकट इसी तरह बरकरार रहा तो 2050 तक देश की जीडीपी 6 प्रतिशत तक गिर जाएगी। छात्रों को बताया गया कि प्रधानमंत्री के आह्वाहन के तहत कैच द रैन के तहत बारिश का पानी जहां गिरे, जब गिरे उसे संरक्षित करना है। रैन वाटर हार्वेस्टिंग का उपयोग तथा खेत पर मेड़, मेड़ पर पेड़ लगा कर हम बारिश का पानी से भूजल रिचार्ज कर सकते हैं। हम दैनिक जीवन में पानी की बर्बादी रोक सकते हैं। छात्रों को यह भी बताया गया कि एक टपकती बूंद से 1 दिन में 4 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है और 1 साल में यह लगभग 14000 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। पानी की टंकी के ओवरफ्लो से 1 मिनट में 10 लीटर शुद्ध पानी बर्बाद हो जाता है, एक खुले नल से 6 लीटर प्रति मिनट पानी बर्बाद हो जाता है, 1 लीटर आरो का पानी बनाने में 4 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। कृषि क्षेत्र में 1 किलो चावल की पैदावार होने में लगभग 3000 लीटर पानी का उपयोग होता है, 1 किलो चीनी में लगभग 5 हजार लीटर पानी का उपयोग होता है। छात्रों ने शपथ लेते हुए कहा कि टंकी के जल को रोकने के लिए वाटर अलार्म लगाएंगे, खुले नल से काम न करके मग और बाल्टी से दैनिक जीवन के कार्य करेंगे, आरओ के वेस्ट वाटर का उपयोग पोछा लगाने, बर्तन धोने तथा 50 प्रतिशत नल का पानी मिलाकर पेड़ पौधों की सिंचाई करेंगे, कार और मोटरसाइकिल की धुलाई में बाल्टी और मग का उपयोग करेंगे। धान की तरह जहां संभव हो दलहन और तिलहन की फसल के लिए किसानों को समझाएंगे, ड्रिप इरिगेशन से किसान 70 प्रतिशत तक जल की बचत कर सकते हैं यह भी बताएंगे। छात्रों ने यह भी शपथ ली कि अपने घर में तथा बाहर कम से कम 5 लोगों को जागरूक करेंगे। इस ऑनलाइन कार्यशाला में राजकीय पॉलिटेक्निक आजमगढ़, जीडी ग्लोबल स्कूल, सर्वोदय पॉलीटेक्निक के छात्र एवं छात्राएं, शिक्षकों सहित लघु सिंचाई विभाग के एई सुधाकर सिंह तथा सभी अवर अभियंता तथा भूगर्भ जल विभाग के हाइड्रोलॉजिस्ट आनंद प्रकाश, अवर अभियंता राशिद, रामाअवध आदि उपस्थित रहे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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