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आजमगढ़: राज्य एससी-एसटी आयोग की टीम पंहुचीं पलिया गांव, जानी हकीकत



आयोग के उपाध्यक्ष के नेतृत्व में 06 सदस्यीय कमेटी गांव में पहुंची

पीड़ितों से बात कर कहा जांच के बाद दोषियों को मिलेगी सजा

आजमगढ़: रौनापार थाना क्षेत्र के पलिया गांव में 29 जून को घटित घटना की जांच करने के लिए उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष रामनरेश पासवान के नेतृत्व में गठित छह सदस्यीय कमेटी बुधवार की देर शाम गांव में पहुंची।स्वजनों से घटना के बारे में विस्तृत जानकारी ली। आयोग की पूरी टीम लगभग डेढ़ घंटे तक गांव में की गई तोड़फोड़, नष्ट किए गए सामानों की जांच की। आयोग के उपाध्यक्ष राम नरेश पासवान ने कहा कि पलिया की घटना अत्यंत निंदनीय है। परिवार के सभी सदस्यों से घटना के संबंध में पूरी जानकारी ली गई है। इसकी रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जाएगी।किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है। इस संबंध में डीएम और एसपी द्वारा भी रिपोर्ट दी गई है, जिसका अवलोकन किया जाएगा। पूरे तथ्यों से शासन को अवगत कराया जाएगा।अनुसूचित जाति- जनजाति की सदस्य अनीता सिद्धार्थ ने कहा कि पलिया में महिलाओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया है, वह कतई उचित नहीं है। दोषियों को शीघ्र ही दंडित किया जाएगा। रौनापार थाना क्षेत्र के पलिया गांव में 29 जून को लड़की के विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट हो गई थी। बीच-बचाव करने गई रौनापार पुलिस के दो सिपाहियों विवेक त्रिपाठी और मुखराम यादव को ग्रामीणों ने मारपीट कर घायल दिया था।आरोप है कि इससे नाराज पुलिस के लोगों ने गांव में रात्रि में नौ बजे पहुंचकर तीन जेसीबी से चार लोगों के मकान क्षतिग्रस्त करने के साथ सामान भी तहस-नहस कर दिया था।घर के बाहर खड़ी बाइक, एक ट्रैक्टर आदि को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इसको लेकर महिलाएं दो जुलाई से गांव में ही धरने पर बैठ गईं। अनुसूचित समाज के लोगों पर हुए अन्याय की खबर मिलते ही राजनीतिक दलों के लोग सक्रिय हो गए। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के ट्वीट के बाद यह मामला पूरी तरह से गरमा गया। प्रशासन सकते में आ गया। बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच जिला प्रशासन ने पीड़ितों की सारी मांगे मान लीं। 10 जुलाई को भाजपा नेता मनीष मिश्रा और जयनाथ सिंह की पहल पर धरना खत्म हुआ था,लेकिन परिवार और ग्रामीण इससे संतुष्ट नहीं हैं। आयोग के सदस्यों कमलेश पासी, शेषनाथ आचार्य,तीजाराम, अनीता सिद्धार्थ और मनोज सोनकर ने पीड़ित परिवार की सुनीता देवी, अनीता देवी, स्वतंत्र कुमार, मुन्ना पासवान, पूनम देवी, प्रभावती, मिंटू, पिंकू, मंजू, प्रियंका, चंपा, संध्या से मिलकर विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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