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आज़मगढ़: 'ऑनलाइन व ऑफलाइन शिक्षा : अनुभव,समस्याएँ एवं समाधान' विषय पर विद्यार्थियों ने किया विमर्श





आर. के. एम. कैंपस में निबंध, सुलेख एवं रंगोली प्रतियोगिताएं आयोजित हुई

हम 2021 में बेहतर शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे,भारत विश्व में मेडिकल, टेक्नोलाॅजी एवं अर्थ के क्षेत्र में मिसाल पेश करेगा- खड़ग बहादुर सिंह

आज़मगढ़: मकर संक्राति की पूर्व संध्या पर सगड़ी क्षेत्र के धनछुला स्थित आर के एम कैंपस में विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसमें जनपद के 197 विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर प्रतिभाग किया।
प्रतियोगिता के अंतर्गत निबंध, सुलेख एवं रंगोली की प्रतियोगिता रखी गयी थी। निबंध प्रतियोगिता का विषय- 'ऑनलाइन & ऑफलाइन शिक्षा : अनुभव समस्याएँ एवं समाधान' के तहत लगभग 69 विद्यार्थियों ने भाग लिया। एक विद्यार्थी ने अपने आलेख में लिखा -"ऑनलाइन क्लास में नेटवर्क की समस्या के कारण कक्षाकार्य व गृहकार्य की ई-बुक भेजने में देर हो जाती थी, इतने में क्लास का टाइम ओवर हो जाता था।" यह शब्द शिक्षा के प्रति जागरूक विद्यार्थी की मूल भावना व संकट का बोध करा रहे हैं। एक अन्य विद्यार्थी लिखती है कि -"गैजेटस से निकलने वाली विकिरण ने हमारे शरीर, आँख व दिमाग को कष्टदायक स्थिति में पहुंचाया, इसके हानिकारक पहलू ने हमें चिड़चिड़ा भी बना दिया।" वहीं एक और विद्यार्थी लिखती है कि- "ऑनलाइन शिक्षा के लिये हमें समय से मोबाइल नहीं मिल पाता था। घर का माहौल शांत नहीं था, हम कई भाई-बहन एक साथ पढ़ते थे तो हममे से किसी एक को ही सिस्टम मिल पाता था। शिक्षक से अपने डाउट्स क्लियर करने के लिये सुव्यवस्थित सवाल-जवाब का भी मौका नहीं मिल पाता था जिससे हम बहुत दुःखी व आहत हो जाते थे लेकिन मनमसोसने के अतिरिक्त हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।" प्रतियोगिता में विजेता रहीं विद्यार्थी : प्रथम- खुशी सिंह, द्वितीय- तनु विश्वकर्मा, तृतीय स्थान पर टाई हुआ जिससे- नीरू सिंह एवं जागृति शर्मा संयुक्त विजेता बनीं।
वहीं 'गो कोरोना गो' के अंतर्गत रंगोली प्रतियोगिता कराई गयी। जिसमें 30 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने रंगों और रेखाओं का सुन्दर संयोजन कर कलात्मक के साथ संदेशपरक रंगोली बनाई। ऑनलाइन पढ़ाई, ऑफलाइन जिन्दगी, कोरोना के वास्तविक कैरियर, सिमटम्स एवं भगाने के फार्मूले पर केंद्रित रही। विजेता : प्रथम पुरस्कार 'गो कोराना गो' क्रियेशन टीम अंशिका यादव, आँचल राय, आँचल मौर्य, सलोनी सिंह, रिम्पा पटेल, प्रीती पाल, अर्चना यादव व रितिका कुमारी हैं।
द्वितीय पुरस्कार 'कोरोना वैरियर्स' की टीम ज्योति यादव, आरती पाल, तनु विश्वकर्मा, अर्चना प्रजापति, मेघना रजक व प्रीती कुमारी, नीरू सिंह, रोली, दीप्ति मिश्रा, नेहा, सोनम, अंजली हैं। द्वितीय पुरस्कार संयुक्त रूप से दो टीम को दिया गया।
तृतीय पुरस्कार : 'विश्व अर्थतंत्र व पलायन' की टीम पूनम यादव, नन्दनी गोंड, श्वेता, रूबी, अमीषा, नेहा, अन्तिमा, खुश्बू हैं।
इसी तरह 'सुन्दर, स्वच्छ लेखन उम्दा नंबर' के अंतर्गत हिंदी, अंग्रेजी एवं अन्य भाषा में सुलेख लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गयी। इसमें 93 विद्यार्थियों ने भाग लिया। जिसमे प्रथम पुरस्कार रिम्पा पटेल, द्वितीय पुरस्कार शिवाला पटेल (हिंदी, अंग्रेजी), तृतीय पुरस्कार ज्योति यादव (हिंदी, भोजपुरी) रही हैं।
उपरोक्त कार्यक्रम के अवसर पर कैंपस के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन सहभागिता रही। संस्था चेयरमैन खड़ग बहादुर सिंह ने अपने संदेश में बच्चों को प्रोत्साहित करते हुये कहा कि 'हम 2021 में बेहतर शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। भारत ने वैक्सीन तैयार कर लिया है। हम उम्मीद करते हैं कि मौजूदा भारत एवं भविष्य का भारत विश्व में मेडिकल, टेक्नोलाॅजी एवं अर्थ के क्षेत्र में मिसाल पेश करेगा।' वहीं संस्था की निदेशक डाॅ. सुनीता ने डिजिटल इंडिया के आह्वान में कोराना की अहम भूमिका को चिन्हित करते हुये कहा कि "धीरे-धीरे ही सही, वायरस के कंधे पर बैठकर ही सही, तमाम खामियों के बावजूद ग्रामीण भारत भी तकनीकी रूप से मजबूत हो रहा है। बेशक शैक्षिक दृष्टि से हमारे समक्ष व्यापक चुनौती है जिसका मिलजुल कर हल निकालना ही होगा क्योंकि ग्रामीण-भारत टेक्नोलॉजी शिक्षा का पूर्ण लाभ लेने में असमर्थ रहा है जिसके पीछे की मुख्य वजह आर्थिक असमानता, तकनीक की अनुपलब्धता एवं मजदूर वर्ग के पास एन्ड्रायड सिस्टम का न होना है।
इस अवसर पर प्रिंसिपल डाॅ. सतीश, मीनाक्षी तिवारी के साथ-साथ सुहेल, अंकुर, सीमा राय, कुलदीप सिंह, पिंटू, जयहिंद, प्रीति पटेल, धनंजय सिंह, सूरज, अवधेश व निशा आदि सभी उपस्थित रहे।

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