.

.

.

.

.

.
.

बिलरियागंज के अहिंसक व शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर प्रशासनिक हिंसा लोकतंत्र की हत्या - राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल

मौ0 ताहिर मदनी की गिरफतारी पार्टी को बदनाम करने की राजनैतिक साज़िश - ठाकुर अनिल सिंह

राष्ट्रिय उलेमा कौंसिल ने मीडिया के सामने रखी अपने प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट 

आज़मगढः राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल ने अपनी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल की जांच रिपोर्ट में बिलरियागंज कस्बे के मौलाना जौहर अली पार्क मे 4 फरवरी 2020 को शुरू हुए सीएए/एनआरसी/एनपीआर विरोधी महिलाओं के प्रोटेस्ट को शांतिपूर्वण बताते हुए प्रशासन पर आधी रात के बाद बर्बतापूर्वण कार्यवाही करने की बात दोहराई है। काउंसिल नेताओं ने प्रेससवार्ता कर दावा किया की मासूम बच्चो समेत वृध्द महिलाओं तक पर पुलिस द्वारा लाठी व आंसू गैस चलाया गया जिसमें कई महिलाएं घायल हुंई और एक वृध्दा अभी भी अस्पताल में गम्भीर अवस्था में भर्ती है की और उसके बाद अंधाधुंध बेगुनाहों की गिरफतारी जिसमें नाबालिग छात्रों से लेकर 65 साल तक मरीज़ शामिल हैं की पार्टी घोर निंदा करती है और इसे साफ तौर पर भारतीय लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की आजादी की हत्या करार देती है। उपरोक्त बातें राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल के वरिष्ठ नेतागण प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर अनिल सिंह, प्रवक्ता तलहा रशादी व जिलाध्यक्ष शकील अहमद ने प्रेसवार्ता में कही।
पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर अनिल सिंह ने बताया कि, ‘‘इस पूर प्रकरण का सत्य जानने के लिए पार्टी ने एक प्रतिनिधिमण्डल बनाया था जिसने दो दिन में बिलरियागंज जाकर वहां के स्थानीय निवासियों , प्रबुद्ध  व्यक्तियों, पीड़ित परिवारों, घायलों से मुलाकात की तो वहीं जेल जाकर गिरफतार व्यक्तियों से भी मुलाक़ात की और पूरे प्रकरण को समझा और रिपोर्ट तैयार की है। उन्हों बताया की प्रदर्शन पूर्ण रूप से शांतिपूर्वक था और पार्क में हाथों में तिरंगा लिये बच्चे व महिलाएं बैठी हुई थीं, न कोई सड़क जाम, न हिंसा न कोई उत्तेजक नारेबाज़ी। पार्टी ने रिपोर्ट में दवा किया की प्रदर्शन पूर्ण रूप से इलाकाई महिलाओं का था जिसमे हिन्दु-मुस्लिम सभी शामिल थे और जिसका न किसी संगठन न किसी दल से लेना देना था।
तल्हा रशादी ने कहा की प्रशासन स्वयं व क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों के जरिये दिन में कोशिश करता है धरने को समेटने की परन्तु महिलाएं शांतिपूर्वक प्रदर्शन जारी रखने को अड़ी रहती हैं यह कह कर कि, ‘‘क्षेत्र के लोग दिसम्बर से बिलरियागंज में धरना प्रदर्शन की अनुमति मांग रहे हैं परन्तु प्रशासन टाल मटोल कर रहा है हम यहां से नही हटेंगे जब तक हमें धरना की लिखित परमिशन नही मिलती।
दावा किया की 3 बजे रात में पुलिस द्वारा महिलाओं पर बल प्रयोग किया जाता है जिसके बाद धरना स्थल पर अफरातफरी और चीख-पुकार हुई जिसे सुन कुछ मर्द आस-पास से पहुंचते हैं जिन पर भी बल प्रयोग किया जाता है और उन्हे गिरफतार कर लिया जाता है। इस बल प्रयोग में अनेक महिलाएं व पुरूष घायल हो जाते हैं और वहां भगदड़ मची ।
उलेमा कौंसिल नेताओं ने कहा की दर्जनों लोगों को गिरफतार कर लिया जाता है जिसमें कक्षा 10 व 12 में पढ़ने वाले नाबालिग छात्र समेत, बी-टेक कर रहे छात्र व मजदूरी करने वाले युवा तथा 65 साल तक के बुज़ुर्ग मरीज़ भी शामिल होते हैं जिसमें से कुछ ऐसे भी हैं जो नमाज पढ़ने निकले थे और उन्हे भी उठा लिया गया।
गिरफतार किये गए लोगो में राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना ताहिर मदनी भी होते हैं जो कि बिलरियागंज के निवासी भी हैं उन्हे जिला प्रशासन स्वंय ही अपनी मदद के लिए धरनारत महिलाओं को समझाने हेतु बुलाता है जिसके तमाम सबूत हैं और मौलाना सुबह से शाम तक कई बार धरनास्थल पर जाकर महिलाओं के समझाते हैं, रात 1 बजे के आस-पास भी जिला के आला अधिकारियों के साथ वह महिलाओं को समझाते हैं जिसकी खबरें, तस्वीर और वीडियों तमाम अखबार, न्यूज़ पोर्टल और सोशल मीडिया पर भी मौजूद है।
आरोप लगाया की जब ताहिर मदनी राज 1 बजे के बाद जब मौलाना ताहिर मदनी के मनाने के बाद भी महिलाएं नही मानती हैं तो प्रशासन उन्हे भी गिरफतार कर लेता है और इसके बाद बल प्रयोग कर मैदान खाली करवाता है और तमाम बर्बता की हदें पार कर दी जाती हैं।
उलेमा कौंसिल ने मौलाना ताहिर मदनी जिन्होने हर स्तर पर प्रशासन का सहयोग किया और बिलरियागंज की हिन्दु-मुस्लिम अवाम के आहवान पर वहां प्रस्तावित 23 दिसम्बर, 4 जनवरी, 26 जनवरी के धरने को प्रशासन के कहने पर लोगों को समझा-बुझाकर टलवा दिया। उन ताहिर मदनी को ही प्रशासन ने मुख्य नेतृत्वकर्ता दर्शाया है जिनकी वजह से ही क्षेत्र की शांति व्यवस्था बनी रही।
रिपोर्ट में मिले तथ्यों से ये स्पष्ट होता है कि एक सोची समझे राजनैतिक षडयंत्र के तहत मौलाना ताहिर मदनी और राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल की छवि को धुमिल करने हेतु ये साज़िश रची गई ताकि मौलाना व पार्टी को बदनाम कर इलाके में उनके प्रभाव को कम किया जा सके।
राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल स्पष्ट रूप से मांग राखी  कि तत्काल इस फर्जी मुकदमे को वापस लिया जाए और इन निर्दोषों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया जाए सरकार के ईशारे पर जारी इस दमन को रोका जाए। अन्यथा राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल और आजमगढ़ की अवाम लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए मजबूर होगी।

Share on Google Plus

रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

आजमगढ़ लाइव-जीवंत खबरों का आइना ... आजमगढ़ , मऊ , बलिया की ताज़ा ख़बरें।
    Blogger Comment
    Facebook Comment