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आज़मगढ़ : मण्डलायुक्त की सख्ती पर चारागाह की भूमि हुई अतिक्रमणमुक्त, कई जिम्मेदार फंसे

कूटरचित ढंग से रकबा बढ़ा अकृषिक भूमि घोषित करने पर तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल के विरुद्ध कार्यवाही की संस्तुति 

आज़मगढ़ 24 जनवरी -- मण्डलायुक्त कनक त्रिपाठी द्वारा दिये गये सख्त निर्देश पर हुई त्वरित कार्यवाही के फलस्वरूप जहाॅं एक गांव की चारागाह की भूमि जो फर्जी इन्द्राज के आधार पर चारागाह खाते से खारिज होकर भूमिधरी खाते में दर्ज कर दी गयी थी, का फर्जी इन्द्राज निरस्त कर पुनः चारागाह के खाते दर्ज करने की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गयी है। इसी प्रकार उन्होंने एक अन्य मामले में भी कूटरचित खतौनी व छद्म दस्तावेज के आधार भूमि का रकबा काफी बढ़ा कर अकृषिक घोषित किये जाने पर जहाॅं तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक व लेखपाल के विरुद्ध कार्यवाही की संस्तुति की गयी है वहीं इन दोनों मामलों में फर्जी, कूटरिचत तथ्यों के आधार पर गलत इन्द्राज कराकर अनुचित लाभ लेने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के भी निर्देश दिय। ज्ञातव्य हो कि गत मंगलवार को तहसील मेंहनगर में आयोजि सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर मण्डलायुक्त कनक त्रिपाठी के समक्ष उक्त तहसील अन्तर्गत ग्राम देवरिया निवासी बाबूलाल प्रजापति पुत्र टिल्ठू प्रजापति ने इस आशय का शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया था कि उनके गांव में चारागाह की भूमि को फर्जी इन्द्राज के आधार पर भूमिधरी खाते में अंकित कर दी गयी है। मण्डलायुक्त ने प्रकरण को गंभरीता से लेते हुए पूरे मामले की जाॅंच हेतु तहसीलदार को तत्काल जाॅंच कर आख्या उपलब्ध कराये जाने हेतु निर्देशित किया। तहसीलदार मेंहनगर ने अपनी आख्या में अवगत कराया गया उक्त की आराजी नं. 573, रकबा 0.121 हेक्टेअर को फर्जी इन्द्राज के आधार पर चारागाह खाते से खारिज होकर गांव के दिल्लू, जगरोपन, कलऊ, गामा पुत्रगण बदन एवं छेदीलाल, विकास पुत्रगण रामकेर के नाम बतौर संक्रमणीय भूमिधर दर्ज है तथा अभिलेखों में इसका भौमिक अधिकार प्रारम्भ होने का वर्ष 1384 फसली अंकित है। तहसीलदार ने अपनी आख्या में यह भी स्पष्ट किया कि राजस्व अभिलेख में कूटरचना के आधार पर सुरक्षित भूमि को भूमिधरी खाते की आराजी में दर्ज कराते हुए नया खाता कायम किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि उक्त अंकन के सम्बन्ध में किसी सक्षम प्राधिकारी/न्यायालय का आदेश अभिलेखों में दर्ज नहीं है। तहसीलदार द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि उक्त अंकन 43 वर्ष पूर्व हुआ है तथा उस समय सारी कार्यवाही तत्कालीन लेखपाल सतई के द्वारा की गयी है। उन्होंने यह भी बताया कि फर्जी इन्द्राज को निरस्त कर अतिक्रमणमुक्त कराते हुए पुनः चारागाह खाते में अंकित किये जाने की कार्यवाही की जा रही है।
मण्डलायुक्त कनक त्रिपाठी को उक्त सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर एक अन्य मामले में ग्राम मियापुर वासदेवा निवासी अरविन्द सिंह एवं रामनिवास सिंह ने इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया था कि गांव के गाटा संख्या 44, रकबा 1.578 हेक्टेअर के आधे भाग के मालिक रामबचन सिंह के द्वारा पूर्व लेखपाल के साथ मिलीभगत करके भूमिधरी को सम्मिलित करते हुए वास्तविक रकबे के स्थान पर 2.023 हेक्टेअर को अकृषिक घोषित करा दिया गया है। मण्डलायुक्त श्रीमती त्रिपाठी ने इस मामले में भी तहसीलदार को पूरी जाॅंच कर आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था, जिस पर तहसीलदार ने अपनी एवं उपजिलाधिकारी की संयुक्त आख्या शुक्रवार को मण्डलायुक्त के समक्ष प्रस्तुत करते हुए अवगत कराया कि राजस्व अभिलेखों के परीक्षण एवं सत्यापन से स्पष्ट है कि उक्त ग्राम के आराज नं. 44 का बन्दोबस्ती क्षेत्रफल 1.578 हेक्टेअर है जिसमें सत्यनरायन व श्यामनरायन का अलग अलग आधा अंश 0.789 हेक्टेअर रकबा निहित है, परन्तु रामबचन पुत्र श्यामनरायन के द्वारा कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अपना हिस्सा 2.023 हेतु दर्शाते हुए उसमें विद्यालय निर्मित होने के सम्बन्ध में छद्म दस्तावेज प्रस्तुत कर अकृषिक दर्ज कराने की कार्यवाही तत्कालीन लेखपाल रामश्रय गिरि व सभाजीत एवं तत्कालीन राजस्व निरीक्षक समौधी राम की मिलीभगत से की गयी है। उन्होंने यह भी बताया कि पत्रावली के परीक्षण से यह भी स्पष्ट हुआ कि उक्त गाटा में रकबा 2.023 हेक्टेअर बाबा रामटहलदास विशाल महाविद्यालय भरथीपुर के नाम अंकित है तथा तत्समय कार्यरत लेखपल रामश्रय गिरि के द्वारा जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी है उसमें 20 पक्का कमरा एवं भूमि के चारो तरफ 7 फुट ऊॅंची चहार दीवारी निर्मित होने का उल्लेख है, परन्तु आख्या लेखपाल सभाजी राम के हस्तलेख में है मगर बतौर लेखपाल हस्ताक्षर रामश्रय गिरि का है, जबकि राजस्व निरीक्षक के स्थान पर तत्समय कार्यरत प्रभारी राजस्व निरीक्षक समौधी राम के द्वारा लेखपाल आख्या से सहमत होकर उक्त विद्यालय बने होने की पुष्टि की गयी है। मण्डलायुक्त श्रीमती त्रिपाठी ने इस मामले में तत्कालीन लेखपाल रामश्रय गिरि व सभाजीत राम, राजस्व निरीक्षक समौधी राम के साथ ही तत्कालीन उपजिलाधिकारी मेंहनगर अमृतलाल एवं तत्कालीन तहसीलदार किशोर कुमार गुप्ता को भी समान रूप से दोषी मानते हुए इन सभी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की संस्तुति शासन, राजस्व परिषद एवं सम्बन्धित जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी है। इसी के साथ उन्होंने दोनों प्रकरणों संलिप्त सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ ही कूटरचित ढंग से फर्जी इन्द्राज कराने वालों के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराने का निर्देश दिया है।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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