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आजमगढ़: पिता की मौत के बाद बदले की आग में सुलग रहा था लक्ष्मण,बदला ले कर पंहुचा यमलोक

एसपी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह के नेतृत्व में हुआ प्रदेश में वर्तमान दौर का सबसे बड़ा एनकाउंटर 

अन्तर्जनपदीय कान्ट्रेक्ट शूटर, थाना महाराजगंज का हिस्ट्रीशीटर टाप टेन, दुर्दान्त अपराधी लक्ष्मण यादव गैंग से हुई पुलिस मुठभेढ़- प्रो0 त्रिवेणी सिंह, एसपी , आजमगढ़  

आजमगढ़.: पूर्वांचल का कुख्यात डेढ़ लाख का इनामी बदमाश लक्ष्मण यादव के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद सेवानिवृत्त डीआईजी के परिजनों ने भी जहां राहत की सांस ली है। साल 1985 में लक्ष्मण यादव के पिता रामदरश यादव की भी पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गयी थी, पिता की मौत के बाद लक्ष्मण यादव को शक था कि अम्बेडकर नगर जिले के राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के चोरमरा कमालपुर गांव के रहने वाले डीआईजी जेपी सिंह ने ही उसके पिता को मुठभेड़ में मरवाया है, उसके बाद लक्ष्मण यादव और डीआईजी जेपी सिंह के बीच अदावत शुरू हो गयी थी।लक्ष्मण का पिता रामदरश यादव भी अपने दौर का कुख्यात बदमाश था। उसका 1984 में अंबेडकर नगर जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र के पद्मपुर गांव में एनकाउंटर हुआ था। उस समय से ही लक्ष्मण को यह लगा पद्मपुर गांव निवासी रविंद्र प्रताप सिंह ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से रामदरश को घेर थे। यदि यह नहीं घेरते तो शायद रामदरश भाग जाता। पिता रामदरश के मारे जाने के लिए लक्ष्मण रविंद्र सिंह को जिम्मेदार मान रहा था। रविंद्र के भाई जेपी सिंह डीआईजी के पद से रिटायर हो चुके हैं। जिस समय जेपी नौकरी में थे उस समय लक्ष्मण ने हिम्मत नहीं की। लेकिन जेपी के रिटायर होते ही उसने अपना बदला ले लिया। इस मामले में भी अंबेडकर नगर जिले की पुलिस को लक्ष्मण यादव की तलाश थी। एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि लक्ष्मण यादव के पिता रामदरश आदि ने डकैती डालने की योजना बनाकर 1984 में धावा बोला था। गांव वालों को पता चलने पर सभी ने घेराबंदी कर ली जिसका परिणाम रहा कि रामदरश मारा गया, जबकि अन्य लोग भाग निकले। गुरुवार को लक्ष्मण यादव के मुठभेड़ में ढेर होने की सूचना पर रिटायर डीआईजी सहित उनके परिवार के लोगों ने आजमगढ़ पुलिस को बधाई दी है।
34 सालों का लम्बा अंतराल भी गुजर गया, लेकिन लक्ष्मण यादव ने डीआईजी जेपी सिंह के परिवार को निशाने पर ही रखा। इसी बीच मौका मिलते ही लक्ष्मण यादव अपने साथी सुनील के साथ मिलकर सितम्बर 2019 में सेवानिवृत्त डीआईजी जेपी सिंह के भाई रवि प्रताप सिंह को गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद डीआईजी का परिवार काफी खौफ में जी रहा था। गुरूवार को जब पुलिस ने उसे इनकाउंटर में ढेर किया तो अब डीआईजी के परिजन ने राहत सांस ली है। उनका कहना है कि पुलिस ने शानदार काम किया है।
बता दें कि महराजगंज थाना क्षेत्र के नहरूमपुर गांव के समीप गुरूवार को पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ में डेढ़ लाख के इनामी बदमाश लक्ष्मण यादव को पुलिस ने ढ़ेर कर दिया। नहरूमपुर (देवारा) में स्वाट टीम ने डेढ़ लाख के इनामी बदमाश लक्ष्मण यादव और उसके साथी की घेराबंदी कर पुलिस को सूचना दी। इसी बीच बदमाशों ने अपने को घिरता देख पानी में डूबे धान के खेत में लेट गये और पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग करनी शुरू कर दिया। बदमाशों की तरफ से फायरिंग होने पर पुलिस ने भी जबावी कार्रवाई की, जिसमें लक्ष्मण यादव को भी गोली लगी। वही बदमाशों की फायरिंग में सिपाही सुरेन्द्र यादव भी घायल हो गया। घायलों को अस्पताल लाया गया जहां बदमाश लक्ष्मण यादव की मौत हो गयी। एसपी त्रिवेणी सिंह बताया की मृतक बदमाश का लम्बा आपराधिक इतिहास रहा है , उस पर अम्बेडकर नगर, आजमगढ़।, मऊ जनपदों में चार दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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