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इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने निकाला सिगल यूज प्लास्टिक का थ्री स्टार समाधान


खाली प्लास्टिक बोतलों से पेड़-पौधों की ड्रिप विधि द्वारा सिचाई का अनूठा प्रयोग किया 

आजमगढ़ : सिगल यूज प्लास्टिक बोतल का जल संरक्षण की दिशा में अनूठा उपयोग करके राजकीय पालीटेक्निक हर्रा की चुंगी के शिक्षक इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने बेहतर संदेश दिया है।
ग्लूकोज एवं कोल्डड्रिक की उपयोग हो चुकी बोतलों से कालेज परिसर में लगे पेड़-पौधों की ड्रिप विधि द्वारा सिचाई का अनूठा प्रयोग करके दिखाया। वे इसे 'थ्री स्टार समाधान' व्यवस्था कहते हैं।
कहते हैं कि इसके तीन फायदे हैं। एक तो सिगल यूज प्लास्टिक बोतलों का पुन: उपयोग, दूसरा ड्रिप विधि सिचाई से जल की बचत और तीसरे एक बाल्टी पानी से लगभग 20 पेड़-पौधों की सिचाई की जा सकती है। यदि इस विधि के उपयोग से लाखों-करोड़ों उपयोग हो चुकी प्लास्टिक की बोतलों का पुन: उपयोग हो सकेगा। साथ ही करोड़ों लीटर जल की बचत और पेड़-पौधों का विकास सुरक्षित ढंग से हो सकेगा।
बेकार पड़ी ग्लूकोज व कोल्डड्रिक की उपयोग हो चुकी बोतलों के प्रयोग से पर्यावरण संरक्षण होगा। एक बाल्टी पानी में लगभग 20 पौधों की सिचाई होगी। इस विधि से एक लीटर प्लास्टिक बोतल का पानी लगभग चार घंटे तक बूंद-बूंद कर पेड़-पौधों की जड़ों में गिरता रहता है जिससे एक-एक बूंद पानी पौधों की जड़ों द्वारा सोख लिया जाता है। टपक सिचाई में जल उपयोग क्षमता 95 फीसद होती है, जबकि पारंपरिक सिचाई प्रणाली में जल उपयोग क्षमता 50 प्रतिशत ही होती है। पारंपरिक सिचाई की तुलना में टपक सिचाई में 70 फीसद तक जल की बचत की जा सकती है।
इसके लिए उन्होंने पहले खुद घर में पड़ी प्लास्टिक की बोतलों को एकत्र किया। छात्रों से भी उपयोग हो चुकीं कोल्डड्रिक और प्लास्टिक की बोतलों को इकट्ठा करवाया। ग्लूकोज की बोतलों को कबाड़ी के यहां से लिया। छात्रों की मदद से बोतल टांगने के लिए सूखी लकड़ी के डंडे तैयार किए। राजकीय पालीटेक्निक कैंपस में पिछले दिनों रोपित किए पौधों के पास डंडा लगाकर ग्लूकोज की बोतलों का उपयोग कर ड्रिप विधि से सिचाई की जा रही है।राजकीय पालीटेक्निक में सिविल इंजीनियरिग विषय में एनवायरमेंट एंड पॉल्यूशन कंट्रोल विषय में सिविल इंजीनियरिग के छात्रों को सिगल यूज प्लास्टिक और जल संरक्षण के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को प्रैक्टिकल ट्रेनिग के अंतर्गत यह होमवर्क दिया गया है। छात्र घर एवं आसपास में उपलब्ध बेकार पड़ी प्लास्टिक की बोतलों को संस्था में लाकर उस बोतल को ड्रिप सिचाई युक्त बनाकर संस्था के सभी पौधों में सिचाई की व्यवस्था करेंगे।
आगामी योजना के बारें में इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने बताया की कलेक्ट्रेट के आसपास सड़क के किनारे लगे सभी पौधों की भी सिचाई की व्यवस्था प्लास्टिक बोतलों से ड्रिप सिचाई युक्त बनाकर करना चाहते हैं। सभी सामाजिक संगठनों का सहयोग लेकर सार्वजनिक स्थलों पर लगे पेड़-पौधों की सिचाई इस विधि से कराई जाएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण एवं जल संरक्षण के रूप में इस जिले के लोग एक उदाहरण पेश कर सकेंगे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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