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आजमगढ़:मोदी लहर में भी मुलायम सिंह चट्टान की तरह खड़े रहे,इसके बाद क्या क्या हुआ ?

अब जा कर योगी ने विश्विद्यालय दिया तो मोदी ने एक्सप्रेस का उद्घाटन यहीं से किया था 

पर रेलवे प्रगति के मामले में खाली हाथ रहा आजमगढ़ 

आजमगढ़ : रिपोर्ट : सूरज जायसवाल: मोदी लहर में जब सारे विरोधी हार रहे थे, तब आजमगढ़ मुलायम सिंह यादव के साथ चट्टानों के तरह खड़े रहे । 2009 के चुनाव में रमाकांत यादव यहां से कमल खिलाने में कामयाब जरूर रहे, पर वह मोदी लहर के बाद भी चुनाव हार बैठे थे। समाजवादी गढ़ ने मुलायम को चुनकर पूर्वांचल से एकलोते मोदी विरोधी को जन्म दिया था। पश्चिम यूपी मे सपा ने 5 सीटों पर अपना परचम लहराया तो, वही नेता जी ने खूद जीत कर पूर्वांचल में पार्टी की लाज बचाई थी। साढ़े तीन लाख के भारी अंतर से जीते मुलायम ने मैनपुरी को इसलिए छोड़ा क्योंकि वह चाहते थे कि आजमगढ़ के बहाने वह पूर्वांचल में विरोध का झंडा उठाए रहेंगे। उपचुनाव के बाद मैनपुरी में उनके पौत्र जीतने में कामयाब हो गए। गोरखपुर और फूलपुर में भी सपा का कब्जा हो गया। हालांकि विरोधी और भाजपा मुलायम सिंह के जीतने के बाद आजमगढ़ लगभग ना आने की दलील देते रहे हैं इधर फिर से मोदी लहर को रोकने के लिए एक बार फिर गठबंधन की गांठे बांध दी गई। अपने अपने लिए आधी यूपी जीतने के लिए अखिलेश और प्रियंका दोनों इस बार पूर्वांचल में दस्तक दे रहे है। यूपी की 18 करोड़ आबादी में सिर्फ 9 करोड़ पूर्वांचल की है। इसे जीतने के लिए एक तरफ अखिलेश अपने पिता के सीट से मैदान में आ रहे हैं तो, वहीं प्रियंका पूर्वांचल की प्रभारी बन हाथ को मजबूत करने यहा उतर गई हैं। पूरे पूर्वांचल को संदेश देने के लिए मुलायम इसलिए आजमगढ़ को चुनते आए हैं, क्योंकि उनका संसदीय क्षेत्र इस बहुचर्चित व प्रस्तावित राज्य के ठीक बीचों बीच में बसा हूआ है। चुनाव में शंखदान के लिए नेता जी ने यही आकर कई बडी़ रैलिया भी की है। पूर्वांचल के 26 में 25 सीटें बीजेपी और उसकी सहयोगी जीतने में कामयाब हो गये। पर उसे हारना यहीं पड़ा , जिसे पूर्वांचल में सपा का गढ़ कहा जाता है। इसलिए ही पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के शिलान्यास के लिए मोदी ने आजमगढ़ को ही चुना। पूर्वांचल के सभी सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन ठीक ठाक देखने को मिला, पर आजमगढ़ से कमल न खिलना उसे हमेशा खटकती ही रही है। 2017 के विस चुनाव में पूर्वांचल की 130 सीटों में से भाजपा ने सौ सीटे जीती थी। इससे बाद भी आजमगढ़ मे उसे दस में एक ही सीट पर संतोष करना पड़ा। इसके पहले हुए चुनाव में भी सपा ने यहा भाजपा का खाता तक खुले नहीं दिया था। भाजपा और मोदी विरोधी यहाँ पर आज भी आरोप मड़ते हैं कि समाजवादी गढ़ के चलते ही देश की सरकार ने यहां के लिए कुछ भी नहीं किया। पिछले वर्ष आजमगढ़ आए मोदी से लोगों की उम्मीदे थी कि इस बार पीएम बनारस और गोरखपुर नई रेल लाइन की घोषणा कर सकते है। उनके आगमन को लेकर इस पर खूब ढोल भी पीटा गया था। इसके शिलान्यास के लिए लालगंज की भाजपा सांसद नीलम सोनकर पीएम से अपील भी कर चुकी थी। इस मुद्दे को उन्होंने संसद के पटल तक भी पहुंच आया था। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा तीन साल पहले यहां आकर इस नई रेल लाइन कि शीघ्र ही शिलान्यास की बातें वह कह गये थे। इसके बाद भी पीएम के क्षेत्र को सीएम के क्षेत्र से जुड़ने वाली इस परिजनों को लटका दिया गया। इस पर लोगो ने आरोप लगया कि इसके रास्ते मे मुलायम का आजमगढ़ पड़ने लगा था। इस लिए ही इसे हरी झंडी नही दी गयी। रेल प्रगति के क्षेत्र में सिर्फ वाराणसी और गाजीपुर में ही विकास देखने को मिला। आजमगढ़ से गए पीएम ने उसी दिन अपने संसदीय क्षेत्र से एक और ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। दूसरे दिन उन्होंने मिर्जापुर में काफी धन उड़ेल दिया , जितने से इस नई रेल लाइन के कार्य को कराए जा सकता था । मऊ से लखनऊ तक चलाई गई इंटरसिटी को भी आजमगढ़ आने से रोक दिया गया। उसे वाया गाजीपुर होकर शाहगंज के रास्ते चलाया जा रहा है। इसके चलते भाजपा के माननीय भी इस रेल का दीदार नहीं कर पा रहे हैं। इसे लेकर आजमगढ़ में जबरदस्त आक्रोश भी देखने को मिला था। इस मुद्दे पर यहां के सांसद भी तब हल्ला बोलने से बचते रहे हैं। इधर विश्वविद्यालय की मांग को लेकर जब लोग आंदोलन पर उतर आए थे, तब सीएम योगी ने आजमगढ़ मे विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की। इसके बदले में योगी आज कहते हैं कि इस बार हम आजमगढ़ मे भी कमल खिलायेगे। इसे लेकर आंदोलन से जुड़े लोग भी भाजपा के पक्ष में अब खड़े दिखाई दे रहे हैं। भाजपा निरहुआ को यहां भेज कर अखिलेश की साइकिल पंचर करने की फिराक में है तो, वहीं भतीजे के लिए बुआ हाथी लेकर तैयार खडी़ है। 

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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