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चिकित्सा क्षेत्र में होमियोपैथी की उपयोगिता तथा इसके विकास पर विस्तार से हुई चर्चा

सरकारें राज्य स्तर  पर ध्यान दें तो होमियोपैथी से स्वस्थ्य भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है- डा. अतुल सिंह, प्राचार्य,होमियोपैथिक विश्वविद्यालय जयपुर

आजमगढ़: होमियोपैथिक मेडिकल एसोशिएशन आफ इंडिया आजमगढ़ इकाई के तत्वावधान में शुक्रवार को शहर के खत्रीटोला स्थित संगठन कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में चिकित्सा क्षेत्र में होमियोपैथी की उपयोगिता तथा इसके विकास के लिए जरूरी कदम पर विस्तार से चर्चा की गयी। होमियोपैथिक विश्वविद्यालय जयपुर के प्रचार्य डा. अतुल सिंह ने दावा किया कि यदि सरकारें स्टेट लेबल पर ध्यान दे ंतो होमियोपैथी से स्वस्थ्य भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। कारण कि एलोपैथ जहां फेल हो जाती है वहां होमियोपैथ कम खर्च में कैंसर, एचआईवी एड्स जैसे असाध्य रोगों को पूर्ण रूप से ठीक करने में सक्षम है।डा. अतुल सिंह ने कहा कि होमियोपैथी मेडिकल साइंस का एक पार्ट है। भारत सरकार ने इसके विकास के लिए अयुष मंत्रालय बनाया है। इसके अन्तरगत होमियोपैथी, आयुर्वेद, सिद्धी और योगा आता है। एलोपैथ मेडिकल की पहली धारा है लेकिन एलोपैथ दवाओं से सिर्फ रोग को दबाया जा सकता है लेकिन होमियोपैथी बिल्कुल अलग है। इसमें डा. दवा देता है और शरीर खुद रोग से लड़ने की क्षमता विकसित करता है। जिसके कारण रोग पूरी तरह नष्ट हो जाता है। यह दोनो पैथी का सबसे बड़ा अंतर है। रही बात तुलना की तो हर साइंस का अपना स्कोप और लिमटेशन होता है। एलोपैथ का अपना स्कोप है होमियोपैथ का उनसे कम नहीं है लेकिन राज्य स्तर पर सरकारें इसपर ध्यान नहीं देती। भारत सरकार की सीसीआरएच युनिट है जो रिसर्च का काम करती है। काउंसिल है जो पढ़ाई का काम देखती है। बस स्टेट लेबल पर ध्यान न देने के कारण इसका विकास एलोपैथी के सापेक्ष कम हुआ है।
उन्होंने कहा कि यूपी में होमियोपैथी के क्षेत्र में काम हुए हैं। यहां निदेशालय अलग है। एजेकेशन और मेडिकल साइंस के अलग अलग डायरेक्टर होते है। इसलिए यहां विकास ज्यादा है। देश के अन्य राज्यों में उपेक्षा के कारण इसका स्कोप कम है। आज पूरे विश्व में 80 देशों में इसकी प्रैक्टिस होती है। लेकिन एशिया में सबसे रिकेज्नाइज है। यही वजह है कि आज रिसर्च हो रहे हैं चाहे वह सरकारी स्तर पर हो या व्यक्तिगत, हम लाइलाज बीमारियों का उपचार भी ढ़ूढ ले रहे है आज होमियोपैथी में कैंसर और एड्स जैसी बीमारी का उपचार आसानी से हो रहा है लेकिन हम इसे वैज्ञानिक ढंग से प्रजेन्ट नहीं कर पा रहे है। इसमें हमारी और सरकार दोनों की कम है। हमें प्लेटफार्म नहीं मिल रहा है। इसलिए होमियोपैथी दूसरी विधा बनी हुई है। तमाम शहरों में बीमार होने के बाद लोग पहले होमियोपैथिक चिकित्सक के पास जाते है। इससे साफ है कि लोगों का विश्वास बढ़ा है। हम बहुत अच्छी स्थित में है लेकिन सोचिए हम मरीज का इलाज कर उसे ठीक तो कर देते है लेकिन डाटा कलेक्शन किसी के पास नहीं मिलेगा। सही मामले में चिकित्सक डाटा कलेक्शन करें और अपनी उपलब्धियों और जो रिसर्च आपने प्रैक्टिस के दौरान की उसे इस तरह के कार्यक्रम में शेयर करे तभी हम होमियोपैथी को उचाई प्रदान कर सकेंगे।
होमियोपैथिक विश्वविद्यालय जयपुर के रजिस्टार डा. तारकेश्वर जैन ने कहा कि होमियोपैथी ने तेजी से प्रगति की है। लोगों का विश्वास हमपर बढ़ा है। लेकिन सरकार के स्तर पर इसपर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसका एक बड़ा कारण एलेपैथिक कंपनियों का वर्चश्व और होमियोपैथ के प्रति दुष्प्रचार है। आज हम होमियोपैथ से असध्यक्ष रोगों का उपचार कर रहे है। सरकार अगर सभी सीएचसी और पीएचसी पर होमियोपैथिक चिकित्सक की तैनाती करे तो बदहाल स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि वो कालेज की स्थापना करे और लोगों को प्रोत्सहित करे। कारण कि होमियोपैथी से हम खर्च में बेहतर उपचार कर सकते हैं।
केंद्रीय होमियोपैथी परिषद के पूर्व सदस्य डा. भक्तवत्सल ने सभी का आभार जताते हुए कहा कि होमियोपैथी को हमें जनजन तक पहुंचाना है। इसके लिए हम निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इस दौरान डा. भक्तवत्सल, ने जयपुर से आये डा. तारकेश्वर जैन, डा. अतुल सिंह, डा. मोहन शर्मा, डा. सुनील, डा. प्रमोद सिंह, डा. गौरव नागर, डा. अमित केथिया का माल्यापर्ण कर स्वागत किया।
इस मौके पर डा. अनुतोष वत्सल, डा. राजेश तिवारी, डा. एसके राय, डा. राजकुमार राय, डा. बी पांडेय, डा. नीरज सिंह, डा. प्रभात यादव, डा. प्रमोद गुप्ता, डा. आनंद, डा. चंद्रगुप्त मौर्य, डा. अजय कुमार पांडेय, डा. रणधीर सिंह आदि उपस्थित थे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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