आज़मगढ़: शहर के पुरानी कोतवाली पर चल रहे श्रीराम लीला मंचन मे मंगलवार की शाम राजा मनु की तपस्या के पश्चात रावण का जन्म और उसके अत्याचार का मंचन हुआ। जिसे देख स्रोता भाव विभोर हो गए।राजा मनु अपने चौथे पन में प्रवेश करने के बाद जीवन को छोड़कर त्याग और तपस्या के लिए जाने लगते है। इस दौरान कई लोग उन्हें मना करते हैं और वह किसी की नही माने । राजा मनु अपना पूरा राजपाट को त्याग कर नेमी सारण के लिए निकल पड़ते हैं। इसके बाद रामलीला का दूसरा प्रसंग रावण जन्म से शुरू होता है। जन्म के बाद रावण अपने भाइयों के साथ भगवान विष्णु की तपस्या करता है। उनके प्रकट होने पर सभी भाई उनसे वर मांगते हैं। जिसमे रावण ने भगवान विष्णु से कहा कि मुझे अमर होने का वरदान चाहिए , परंतु भगवान विष्णु ने कहा कि जो भी इस पृथ्वी लोक पर जन्म लिया है उसे मृत्युलोक को जाना ही होगा । तब रावण कहता है ठीक है मुझे आप ऐसा वरदान दीजिए कि मेरी बंदर और व्यक्ति के हाथों ही हार हो। वरदान पाने के बाद पृथ्वी लोक पर और देव लोक में रावण का अत्याचार शुरू हो जाता है चारों तरफ हाहाकार मच जाता है रावण के अत्याचार से सभी देवता और पृथ्वी वासी कपङे लगते है। वे रावण के अत्याचार से मुक्ति पाने के लिए भगवान से प्रार्थना करने लगते है।
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