.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.
.

सामाजिक परिवर्तन का सिनेमा’ है फिल्म फेस्टिवल की टैग लाइन,तमसा की कहानी पर भी लघु फिल्म


प्रथम बार इस तरह का आयोजन होने से जनपद के कलाप्रेमी उत्साहित है- ममता पंडित 
नाटक और सिनेमा से भी समाज में परिवर्तन ला सकते हैं -डा. खुशबू सिंह
'तमसा ए टेल ऑफ हाॅली रिवर' फिल्म के माध्यम से नदी का दर्द और आजमगढ़ वासियों का जज्बा दिखाने का होगा प्रयास - निर्देशिका रोशनी भाटी 
आजमगढ़: दिग्गज रंगकर्मी व फिल्म अभिनेता स्व.ओमपुरी की स्मृति में तीन दिवसीय प्रथम इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन राहुल प्रेक्षागृह में किया गया है। ‘सूत्रधार’ संस्थान व ‘निनाद’ फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 26 सितंबर से 28 सितंबर तक चलने वाले इस फिल्म फेस्टिवल थीम ‘सामाजिक परिवर्तन का सिनेमा’ है। कार्यक्रम में बालीवुड प्रसिद्ध अभिनेता यशपाल शर्मा, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट पुणे के पूर्व निदेशक त्रिपुरारी शरण, बालीबुड के फिल्म निर्देशक राजा बुंदेला, सीमा कपूर, प्रतिमा शर्मा, पवन कुमार शर्मा, परवेश कामदार, रंगमंच के सिद्घहस्त अभिनेता व निर्देशक रंजीत कपूर,फिल्म निर्माता संजय सहाय और देश के चर्चित फिल्म व नाट्य समीक्षक अजीत राय मौजूद रहेंगे।
सूत्रधार संस्थान की संयोजक ममता पंंडित ने रविवार को शहर के ठंडी सड़क स्थित एक होटल के सभागार में प्रेस-प्रतिनिधियो से बताया कि आजमगढ़ में प्रथम बार इस तरह का आयोजन होने से जनपद के कलाप्रेमियों में काफी उत्साह है। इस अवसर पर आयोजन समिति की सदस्य डा. खुशबू सिंह ने बताया कि आजकल हमारी पीढ़ी फूहड़ और अश्लील सिनेमा की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है। सिनेमा के बढ़ते बाजारीकरण के दबाव से सिनेमा का स्वरूप बदल रहा है। आज हम अच्छी फिल्माें और नाटकों को छोड़कर और अश्लील फिल्म व नाच के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। इसलिए इस फिल्म महोत्सव के माध्यम से हम कला व सिनेमा प्रेमियों को एक संदेश देना चाहते हैं कि हम नाटक और सिनेमा से भी समाज में परिवर्तन ला सकते हैं। अच्छी फिल्में समाज को अच्छा बनाने में सहयोग करतीं हैं।
वरिष्ठ रंगकर्मी डा. अलका सिंह ने कहा कि यह फिल्म फेस्टिवल सभी रंगकर्मियों, कला व सिनेमा प्रेमियों के लिए प्रेरणादायी साबित होगा। ममता पंडित ने बताया की इस फिल्म फेस्टिवल में ऐसी फिल्मे भी प्रदर्शित की जाएँगी जो अभी तख रिलीज़ भी नहीं हुई। ख़ासकर ओमपुरी की अंतिम फिल्म ' एलेक्स हिंदुस्तानी' का यहीं एक प्रकार से प्रीमियर होगा। फिल्म महोत्सव की शुुरुआत राजा बुंदेला निर्देशित फिल्म अलेक्स हिंदुस्तानी से की जाएगी। दूसरे दिन बालीबुड निर्देशक गीताजंलि सिन्हा निर्देशित ये खुला आसमान, दीपांकर प्रकाश निर्देशित कागपंथ, प्रतिभा शर्मा निर्देशित आमो आखा एक से, राजन कोठारी निर्देशित दास कैपिटल,पवन कुमार शर्मा निर्देशित करीम मोहम्मद और अंतिम दिन प्ररेश कामदार निर्देशित जाॅनी-जॉनी यस पापा, त्रिपुरारी शरण निर्देशित वो सुबह किधर निकल गया, सीमा कपूर निर्देशित हाट द वीकली बाजार, रंजीत कपूर एवं विक्रमजीत सिंह भुल्लड़ द्वारा निर्देशित जय हो फिल्म प्रदर्शित की जाएगी।
ख़ास बात यह है की इंदौर निवासी परिंदा क्रिएशन की डायरेक्टर और ‘तमसा ए टेल ऑफ हॉली रिवर’ की निर्देशिका रोशनी भाटी ने कहा कि तमसा प्राचीन व पवित्र नदी है। यह ऐतिहासिक है की आजमगढ़ के लोगों ने स्वयं आगे बढ़ कर नदी को मिल जुल कर साफ़ कर दिया और लाखों पौधे भी लगाए। शायद यह अपनी तरह का देश में पहला उदाहरण है। उन्होंने बताया की इसी से प्रेरित होकर वह 'तमसा ए टेल ऑफ हाॅली रिवर' लघु फिल्म के माध्यम से नदी का दर्द और आजमगढ़ वासियों का जज्बा दिखाने का प्रयास करेंगी। उन्होंने बताया कि लगभग 15 मिनट की डाक्यूमेंट्री तीन दिन में तैयार हो जाएगी जिसका प्रदर्शन भी फिल्म फेस्टिवल में किया जायेगा। साथ ही आयोजकों ने बताया की इस दौरान फिल्म मेकिंग की एक कार्यशाला का भी आयोजन कर लोगों को प्रशिक्षण दिया जायेगा।

Share on Google Plus

रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

आजमगढ़ लाइव-जीवंत खबरों का आइना ... आजमगढ़ , मऊ , बलिया की ताज़ा ख़बरें।
    Blogger Comment
    Facebook Comment