आजमगढ़ :: केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस से कई लोगों की मौत की खबर है। इससे बचने के लिए वहाँ की राज्य सरकार ने अलर्ट जारी किया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने इस बात की पुष्टि की है कि चार में तीन मौते बुखार की वजह से हुए हैं, जो वायरस के कारण हुए थे। डॉ डी डी सिंह ने बताया कि निपाह वायरस चमगादड़ों के लार से फैलता है, इसलिए लोगों को इससे बचना चाहिए। डॉ. सिंह ने बताया कि निपाह वायरस से बीमार लोगों से स्वास्थ्य व्यक्ति को दूर रहना चाहिए। यह बीमार व्यक्ति के लार से फैल सकता है। यह बहुत आसानी से जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में यह इंसान से इंसानों में फैल सकता है। अगर यह पता चलता है कि कोई निपाह वायरस से बीमार हुआ है तो उसे अस्पातल में भर्ती कराया जाना चाहिए। डॉ डी डी सिंह ने बताया कि यह तेजी से उभरता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है। वायरस को पुराने चमगादड़ ले जाते हैं, जिन्हें फ्रूट बैट भी कहा जाता है। 1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह से पता चला था, वहीं से इस वायरस को ये नाम मिला। उस वक्त इस बीमारी के वाहक सूअर बनते थे। लेकिन इसके बाद जहां-जहां निपाह के बारे में पता चला, इस वायरस को लाने-ले जाने वाले कोई माध्यम नहीं थे। साल 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इस वायरस की चपेट में आए। सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक निपाह वायरस का इंफक्शन एंसेफ्लाइटिस से जुड़ा है, जिसमें दिमाग को नुकसान होता है। इसके लक्षण के बारे में डॉ सिंह ने बताया कि 5 से 14 दिन तक इसकी चपेट में आने के बाद ये वायरस तीन से 14 दिन तक तेज बुखार और सिरदर्द की वजह बन सकता है। 24-48 घंटों में मरीज कोमा में पहुंच सकता है। इंफेक्शन के शुरुआती दौर में सांस लेने में समस्या होती है, जबकि आधे मरीज़ों में न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी होती हैं। दिमाग में सूजन होने लगता है, तेज बुखार और सिरदर्द होता है, मांसपेशियों में दर्द होता है। निपाह वायरस से बचाव के लिए: फल न खाएं। उस व्यक्ति के नजदीक न जाएं जो इस वायरस से पीड़ित हो। इस वायरस की वजह से जिनकी मौत हुई हो, उनके शव से भी दूर रहें। अगर आपको तेज बुखार हो तो अस्पताल जाएं। भ्रामक बातों से बचें और अपने चिकित्सक पर भरोसा बनाए रखें।
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