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तीन ह्त्या आरोपियों को आजीवन कारावास व जुर्माने की सजा

21 जून 1996 को देवगांव थाना के बसही अकबालपुर गांव में हुई थी दलित की ह्त्या 
आजमगढ़ :: दलित की हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को 33 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की कुल राशि में से 50 हजार रुपये मृतक की पत्नी को भी देने का आदेश दिया। अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर 4) संतोष कुमार तिवारी ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। 
मामला देवगांव थाना क्षेत्र के बसही अकबालपुर गांव का है। अभियोजन पक्ष की कहानी के अनुसार वादी मुकदमा जगदीश पुत्र राम सिंगार निवासी वसही अकबालपुर 21 जून 1996 को अपने घर के सामने मंडई में अपने भाई फौजदार, भाभी उर्मिला, माता दिलराजी के साथ सोया था। तभी रात के लगभग एक बजे गांव के ही अलाऊ पुत्र मुर्तजा,इसमिदार पुत्र अब्दुल सत्तार, गुफरान व इस्तियाक और कयामुद्दीन ,जाहिद व सादिक पुत्रगण सगीर अहमद कट्टे व् रिवाल्वर से लैस हो कर जगदीश के दरवाजे पर चढ़ आए। आते ही अलाऊ ने ललकारते हुए कट्टा से फौजदार को गोली मार दी। सादिक ने जगदीश पर फायर किया ,लेकिन वह बच गया। बुरी तरह से जख्मी फौजदार को अस्पताल ले जाया गया ,जहां उसकी मौत हो गई ।
जगदीश ने गांव के कल्पनाथ के मुकदमे में हमलावरों के विरुद्ध गवाही दी थी थी । इसी रंजिश के कारण यह वारदात की गई। पुलिस ने जांच के बाद सभी छह आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में भेज दिया । दौरान मुकदमा जाहिद इसमिदार की मृत्यु हो गई । जबकि आरोपी इस्तियाक फरार हो गया, तब उसकी पत्रावली अलग कर दी गई गई। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी महेंद्र गुप्ता ने वादी जगदीश ,उर्मिला, सीओ स्वामीनाथ ,विवेचक अनंत देव,अरविंद कुमार तथा गणेश को बतौर साक्षी न्यायालय में पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत में आरोपी अलाऊ, सादिक तथा गुफरान को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को 33 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई । जुर्माने की राशि में से पचास हजार रूपये मृतक फौजदार की पत्नी उर्मिला को भी देने का आदेश दिया।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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