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भारतीय अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन की महारैली आयोजित हुई


आजमगढ़: अखिल भारतीय अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन के जिला इकाई के तत्वावधान में डा अम्बेडकर 'मिशन बढ़ाओ एवं आरक्षण बचाओं' को लेकर रविवार को नगर के आईटीआई प्रांगण में महारैली आयोजित हुई। जिसका उद्घाटन एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबा पी भोंसले आईआरएस व धम्मदेशना भदंत महाकश्यप ने किया। संचालन जिलाध्यक्ष डा प्रमोद कुमार गौतम ने किया।
महारैली को संबोधित करते हुए बुद्धमित्र मुसाफिर आईआरएस ने कहा कि भारत में समता, स्वंतत्रता, न्याय और बंधुता पर आधारित समाज का निर्माण ही डा अम्बेडकर मिशन का मूल उद्देश्य है, जो संविधान की प्रस्तावना में निहित है। डा अम्बेडकर मिशन के उद्देश्यों की प्राप्ति किये बगैर स्वस्थ्य एवं समृद्ध भारत की संकल्पना असम्भव है। आज आजादी के 71 वर्ष व संविधान को 68 बरस बीत गये फिर भी देश में पिछड़े वर्ग (एससी,एसटीओबीसी) के साथ जातिगत व्यवहार और अमानवीय अत्याचार लगातार जारी है जो कि संविधान की मूलभावना के विरूद्ध है। हम सभी को मिलकर संवैधानिक तरीके से लड़ना होगा तभी डा अम्बेडकर का सपना साकार हो सकेगा।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा पी भोसले ने कहा कि बोधिसत्व बाबा साहब के गोलमेज कान्फ्ेन्स 1930, 1931, 1932 में मुसलमानों, सिक्खों व इसाईयां को पृथक प्रतिनिधित्व सिर्फ इसलिए दिया गया कि वे हिन्दुओं से पृथक हैं, ठीक उसी प्रकार अस्पृश्यों को भी अलग प्रतिनिधित्व दिया जाये क्यों वि अलग अस्तित्व रखते हैं
एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष अरूण कुमार प्रेमी ने कहा कि बाबा साहब ने लिखा है कि भारत का डिप्रेस्ड क्लास यानि पिछड़ा वर्ग मूलतः नागवंशी बौद्ध हैं, उन्होंने 14 अक्टूबर 1956 में नागपुर में घोषणा किया था कि पांच सालों के भीतर देश में समता, स्वतंत्रता, बंधुता व न्याय पर आधारित बौद्ध समाज की स्थापना कर देंगे लेकिन दुर्भाग्य रहा कि 6 दिसम्बर 1956 को ही डा अम्बेडकर का परिनिर्वाण हो गया, जिसके कारण यह सपना आज तक अधूरा है।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय उप महासचिव नील निगम ने कहा कि 26 नवम्बर 1956 को डा अम्बेडकर ने वाराणसी के काशी हिन्दु विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि इस बापर पर गंभीरता पूर्वक विचार करें कि हिन्दुशास्त्रों में वर्णित जीवन हमारे संविधान के साथ साम्य रखते है, यही नहीं तो क्यों, अम्बेडकर ने आगे कहा था कि या तो धर्मशास्त्र जिन्दा रखा जा जा सकता है या भारतीय संविधान, दोनो एक साथ नहीं।
मंडल महासचिव सत्यप्रकाश बौद्ध ने बताया कि प्रतिनिधित्व आरक्षण भारत के अधिकार विहिन समाज जिसको पिछड़ा वर्ग भी जाता है का सांवैधानिक अधिकार है जिसे निजीकरण, पीपीपी, आउटसोसिंग आदि माध्यमों के जरिये खत्म किया जा रहा है जो अन्याय हैं अगर संवैधानिक अधिकारों व आरक्षण को बचाया नहीं गया तो अधिकार विहिन समाज को मुख्य धारा में शामिल नहीं किया जा सकता, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भविष्य खतरे में होगा। अंत में आंगुतकों के प्रति आभार जिला महासचिव डा राकेश कुमार बौद्ध ने जताया। महारैली में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। 

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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