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कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा क्यों न दे 'मृतक' को मुआवजा


लाल बिहारी 'मृतक' ने 25 करोड़ रूपये हर्जा खर्चा व मानहानि का मुकदमा दाखिल किया है 
प्रदेश के मुख्य सचिव सहित आजमगढ़ के डीएम को 13 मार्च तक का समय दिया गया है
आजमगढ़ :18 वर्षों की लंबी लड़ाई कर खुद को जीवित साबित करने में लगे आजमगढ़ के लाल बिहारी 'मृतक' को खुद को ज़िंदा साबित करने के लिए झेली गयी परेशानियों और उनके लम्बे संघर्ष के लिए मुआवजा क्यों नहीं मिलना चाहिए , यह सवाल हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूपी सरकार से पूछा है। इसके लिए प्रदेश के मुख्य सचिव सहित आजमगढ़ के डीएम को 13 मार्च तक का समय दिया गया है। बता दें कि , निजामाबाद तहसील क्षेत्र के खलीलाबाद गांव निवासी लालबिहारी को चचेरे भाई व पट्टीदारों ने 30 जुलाई 1976 को अभिलेखों में मृत घोषित कराकर सारी सम्पत्ति पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद लालबिहारी ने खुद को जिंदा साबित करने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी, जब सफल नहीं हुए तो 1988 में इलाहाबाद संसदीय सीट से पूर्व प्रधानमंत्री व बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कांशीराम के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो वर्ष 1989-90 में अमेठी से राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। दोनों ही चुनाव में इन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1992 में आजमगढ़ की मुबारकपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। यह अलग बात है कि, किसी भी चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके पूर्व 9 सितम्बर 1986 को खुद को जिंदा साबित करने के लिए मृतक ने विधानसभा में पर्चा फेंका था। उस समय मृतक विधायक रहे स्व. काजी कलीमुर्रहमान के पास पर विधानसभा में घुसे थे। इसके बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाया। मजबूर होकर मृतक ने नया हथकंडा अपनाया और निजामाबाद एसओ को खुद को 151 धारा में जेल भेजने के लिए 500 रुपये घूस देने पहुंच गए, लेकिन जब एसओ को पता चला कि, लालबिहारी अभिलेख में मृतक हैं तो उसने भी पल्ला झाड़ लिया था। इतने के बाद भी लालबिहारी हार नहीं माने और खुद को जिंदा करने के लिए संघर्ष करते रहे। लंबे संघर्षो के बाद 30 जून 1994 में तत्कालीन जिलाधिकारी हौसला प्रसाद वर्मा व मुख्य राजस्व अधिकारी कृष्ण श्रीवास्तव ने लाल बिहारी को भू राजस्व अभिलेखों में पुनः जिंदा कर दिया था। इसी के बाद लाल बिहारी ने मृतक संघ के नाम से संगठन बनाकर अभिलेख में मृत लोगों की लड़ाई शुरू की। साथ ही हाईकोर्ट के लखनऊ खंडपीठ में 25 करोड़ रूपये हर्जा खर्चा व मानहानि का मुकदमा दाखिल किया था

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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