आजमगढ़ : हाड़कंपा देने वाली ठंड से जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित है। लोग घरों में दुबके हुए है, ठंड में बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। सबसे विकट स्थिति रोजमर्रा कमाकर पेट की रोटी इकट्ठा करने वालों के समक्ष उत्पन्न हो गयी है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों बाजारों में अभी तक अलाव जलने की व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे लोगों में रोष है। बाहरी इलाकों में घने कोहरे व कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गलन भरी ठंड में लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। इस समय खेती बारी का काम काफी बढ़ गया है। किसान गेहूं की सिंचाई, खाद, खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव में जी-जान लगा दिये है। इसके चलते ठंड के कहर का ज्यादा सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को पारा लुढ़क कर 5 डिग्री सेंटीग्रेड पर जहां पहुंच गया है वहीं अधिकतम पारा 16 डिग्री तक आ गया है। कुल मिलाकर आमजन बेचारे की हालत में जगह-जगह ठिठुरा हुआ है। ठंड की वजह से बस स्टेशन व रेलवे स्टेशन पर यात्री ठिठुर रहे हैं। शाम होते ही लोग घरों में दुबक जा रहे हैं। शुक्रवार को सूरज देवता के दर्शन भी दुर्लभ हो गए। पार्क व मैदान सूने-सूने दिखे और सड़कों पर भी लोगों की आवाजाही नगण्य रही। ठिठुरन से बचने के लिए गांवों के अलावा शहरों में भी लोग अलाव जलाकर हाथ सेंकते नजर आए। ऐसे में लगता है कि इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड का प्रकोप फिलहाल जारी रहने की आशंका है और आने वाले दिनों में इसमें कुछ और इजाफा हो सकता है। ठंड को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों की छुट्टी की घोषणा कर दी है। हालत यह है की अब सडकों और चट्टी चौराहों पर इधर उधर बिखरने वाला सूखा कूड़ा भी नहीं नजर आ रहा है ,खरपतवार, कागज के टुकड़े आदि इकट्ठा करके आग जलाकर लोग कुछ राहत महसूस कर रहे हैं।
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