मौके पर दोनों पक्ष की भीड़ मौजूद थी तो बिना जांच किसी एक पक्ष पर आरोप लगाना उचित नहीं -शकील अहमद
आजमगढ़ः राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल के ज़िलाध्यक्ष शकील अहमद ने पुलिस वाहन पर पथराव के सम्बन्ध पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का नाम जोड़े जाने की घोर निंदा करते हुए प्रेस को एक बयान जारी किया है। उन्होने कहाकि पुलिस वाहन पर पथराव करना अत्यन्त ही घिनौना कृत्य है और इसे पूर्वाग्रह से ग्रसित हो कौन्सिल के नेताओं व कार्यकर्ताओं से जोड़ना भी अत्यन्त निदंनीय है जबकि सुबह से हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष के पुत्र व पार्टी प्रवक्ता तलहा रशादी व अन्य पार्टी नेतागण प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने में लगे हुए थे वो चाहे सुबह लाश निकालने के दौरान हो या पोस्टमाॅर्टम हाउस के पास या फिर रात में लाश को दफनाने के दौरान लाईट व अन्य चीज़ों की व्यवस्था का मामला रहा हो और मौके पर उपस्थित प्रशासनिक व पुलिस अमले ने इस बात को महसूस भी किया। शव को निकालने और दफनाने के दौरान बड़ी तादाद में आम जनता के साथ ही दोनो पक्ष के लोग मौजूद थे क्योंकि मृतका के बड़े भाई स्वयं व अन्य कई रिश्तेदार भी शहर में ही रहते हैं। जिलाध्यक्ष ने दावा किया की रात को भी पुलिस के कहने पर ही तलहा रशादी व अन्य लोगों ने खड़े होकर बिना किसी विवाद के लाश को दफनाने में सहयोग किया और फिर लाश दफनाने के बाद रशाद नगर से वादी समेत पुलिस की तमाम गाड़ियां सकुशल निकल गई थी । कुछ देर बाद पता चला कि रहमतनगर के पास 100 न0 की किसी पुलिस वाहन पर किसी ने पथराव कर दिया। सवाल उठाया की अगर ओलमा कौन्सिल कार्यकर्ताओं व मौलाना आमिर रशादी के परिवार/समर्थकों को विरोध ही करना होता तो वह पोस्टमाॅर्टम के लिए लाश निकाले जाने से पहले विरोध करते या फिर लाश को दोबारा दफनाए जाने से पहले विरोध करते, समस्त प्रशासनिक प्रक्रिया को सकुशल स्वयं हमारे नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा बिना किसी वाद विवाद के सम्पन्न कराए जाने के बाद हमारे लोग आखिर क्यों पुलिस की गाड़ी या वादी पर पथराव करेंगे? यह साफ ज़ाहिर है कि ऐसी किसी भी घटना से हमे फायदा नही नुक्सान है तो फिर हमारे नेताओं य कार्यकर्ताओं द्वारा ऐसा किया जाना अप्रसांगिक और नामुमकिन है। जिलाध्यक्ष ने कहा की यह सब जानते हैं कि वहां भीड़ दोनो पक्ष की थी और पथराव या किसी भी विवाद या हिंसक विरोध से फायदा किसे होगा इसे समझना बहुत मुश्किल नही है। ऐसे में पथराव कौन और क्यों करवाएगा ये भी बखूबी समझा जा सकता है। ऐसे में ये पुलिस प्रशासन का कर्तव्य बनता है कि वह इस घटना में पूर्वाग्रह से ग्रसित हो एक पक्षीय कार्यवाही/आरोप लगाने के बजाए इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच करे और जिन असमाजिक तत्वों ने इस घटना को अंजाम दिया है उनको चिन्हित कर उनका नाम सामने लाए और उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही करे। इस पूरे प्रकरण से न हमारे किसी नेता का और ना ही हमारे किसी कार्यकर्ता का कोई लेना देना है, इस घटना से हमारी पार्टी या राष्ट्रीय अध्यक्ष के परिवार का नाम जोड़ना न केवल दुखद है बल्कि घोर निंदनीय है और पार्टी और नेताओं की छवि को बिगाड़ सस्ती शोहरत व स्वार्थ को पूरा करने का प्रयत्न है।
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