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पुस्तक मेला में विमर्श : सर सैयद अहमद खां बनाते रहे सांस्कृतिक एकजुटता की राह

आजमगढ़। 18वें आजमगढ़ पुस्तक मेले में सर सैयद अहमद खां के विचारों की समकालीन समय में प्रासंगिकता विषय पर विमर्श का आयोजन किया गया। विषय प्रवर्तन करते हुए अर्थशास्त्र विभाग के मोे. खालिद ने कहा कि सर सैयद अहमद खां अंग्रेजों के समय में नौकरी करते हुए एक ऐसे मनीषी थे जिन्होंने यह मान लिया था कि बिना शिक्षा के प्रसार के हिन्दूस्तान का आवाम जागृत नहीं होगा। उन्होंने 1857 से पहले का भारत देखा था फिर 1857 के बाद का हताश भारत भी देखा था। ऐेसे में आजादी के स्वप्न को साकार करने के लिए नये भारत कें निर्माण के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना उनकी दुरदर्शिता का प्रमाण है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उर्दू विभाग के अध्यक्ष डा. शबाबुद्दीन ने कहा कि सर सैयद अहमद ने बताया कि हिन्दूस्तान उस खूबसूरत दुल्हन की तरह है जिसकी हिन्दू और मुसलमान दो आंखे हैं। यदि एक भी आंख नहीं रही तो हिन्दुस्तान खुबसूरत नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि सर सैयद पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने राष्ट् कैसा होना चाहिए, इसको परिभाषित किया है। वह समाज के सभी वर्गो के उत्थान के बारे में निरन्तर सोचते थे। सर सैयद केवल लेखक और अधिकारी ही नहीं थे वह एक्टिविस्ट की भूमिका में समाज के हर सवाल से टकराने का जज्बा रखते थे। शिब्ली एकेडमी के सीनियर फेलो मौलाना उमैर द्दकी ने कहा कि सर सैयद हर सामाजिक एवं साहित्यिक सरोकारों को गंभीरता से महसूस करते थे और उसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करते थे। डा. मोहम्मद इलियास आजमी ने कहा कि गरीब भारत में किसानों को तकनीक और ज्ञान से जोड़ने का उन्होंने सिर्फ स्वप्न ही नहीं देखा बल्कि उन्हें साकार भी किया। डा अहमद कलीन ने कहा कि सर सैयद ने हमेशा सभी धर्मो के लोगों पर यकीन किया और उन्होंने विश्व ज्ञान और अनुसंधान को भारत की धरती पर लाने को अनेक प्रयोग किया। लखनऊ से आये वरिष्ठ पत्रकार राकेश राय ने कहा कि सर सैयद अहमद खां ऐसे नायक और पूर्वज हैं जो अलगाव की दीवारों को ध्वस्त करती है और सांस्कृतिक एकजुटता का एक राह बनाती है। उन्होंने कहा कि युवाओं की दोस्ती स्वतंत्रता संग्राम के नायकों से होनी चाहिए और यह दोेस्ती किताबों के माध्यम से सम्भव् है। स्वागत करते हुए इतिहास विभाग के अध्यक्ष डा. अलाउद्दीन ने कहा कि सर सैयद अहमद खां ऐसे इतिहास निमार्ता हैं जिनका सरोकार अंतर्राष्ट्रीय था। वे ऐसा भारत बनाना चाहते थे जिसमें किसी तरह का भेदभाव न हो। इस अवसर पर जिला विद्यालय निरीक्षक वी.के.शर्मा ने कहा कि पुस्तक मेला वैश्विक मंच का निर्माण करता है जहां किताबों के माध्यम से पूरी दुनिया का ज्ञान-विज्ञान ज्ञान के मंदिरों में प्रवाहित होता है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डा. रविन्द्र नाथ राय ने कहा कि आज का विमर्श गंगा यमुनी एकता को समझने का विमर्श था। इस अवसर पर डा. अल्ताफ अहमद,डा.हकीमउद्दीन,डा. निशाद परवीन,अबू राफे,उत्पला अधिकारी,सीमा भारती सहित सैकड़ों शिक्षक, विद्यार्थी व नागरिक उपस्थित थे। े 

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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