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पीठासीन अधिकारी मतदाताआें की पहचान करेंगे सुनिश्चित -जिलाधिकारी

आजमगढ़। जिला मजिस्ट्रेट/जिला निर्वाचन अधिकारी चन्द्र भूषण सिंह ने सर्व साधारण को सूचित किया है कि नगरीय निकाय निर्वाचन हेतु आयोग द्वारा उपलब्ध करायी गयी पीठासीन अधिकारियों/कर्मचारियों के उपयोग हेतु निर्देश पुस्तिक 2017 के अध्याय 13 में निर्वाचक की पहचान का सत्यापन और आपत्ति की दशा में प्रक्रिया के सम्बन्ध में निर्देश दिए गये है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया है कि निर्वाचक मतदान केन्द्र में प्रवेश करने पर सीधे मतदान अधिकारी-1 के पास जायेगा। मतदान अधिकारी को निर्वाचक नामावली की प्रविष्टि के अनुसार उसकी पहचान का समुचित रूप से सत्यापन कर लेना चाहिए। सामान्यतया प्रत्येक मतदाता अपने साथ एक गैर सरकारी पहचान पर्ची लाता है जो उसे किसी उम्मीदवार या उसके अभिकर्ता द्वारा दी जाती है। जिलाधिकारी ने कहा है कि इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी निर्वाचन द्वारा ऐसी पर्ची लाना मतदाता की पहचान की गारण्टी नही है और न इससे मतदान अधिकारी ऐसे मतदाता को पहचान के बारें में अपना समाधान किए जाने के अपने कर्तव्य और उत्तरदायित्व से मुक्त हो जाता है। यद्यपि ऐसी पर्ची से निर्वाचक नामावली में किसी मतदाता से सम्बन्धित प्रविष्टियों को ढुढ़ने में सहायता मिल सकती है फिर अभी अपने आप से यह नही माना जा सकता कि पर्ची प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति ही सही मतदाता है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने आगे बताया है कि इसके अतिरिक्त निरक्षर मतदाता पहचान पर्ची की प्रविष्टियां पढ़ नही सकता और अपना यह समाधान नही कर सकता की उसके पास की पर्ची वस्तुत: उससे ही सम्बन्धित है। अतएव मतदान अधिकारी प्रथम को यदि पूरा समाधान न हो पाये तो उस व्यक्ति को पीठासीन अधिकरी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया जाय जो निर्वाचक के पहचान के बारे में अपना समाधान करने के लिए और जांच करेगा। पीठासीन अधिकारी को किसी निर्वाचक को पुलिस को सौपने में हिचकना नही चाहिए यदि यह साबित हो जाय की वह प्रतिरूपण कर रहा है अर्थात अन्य मतदाता बनकर मतदान करना चाहता है। श्री सिंह ने आगे कहा है कि यदि महिला मतदाताओं विशेषत: पर्दानसीन महिलाओं की संख्या बहुत अधिक हो तो उपर्युक्त कर्तव्यों का पालन करने के लिए महिला मतदान अधिकारी द्वाराउपर्युक्त कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्होने बताया है कि आयोग के निदेर्शानुसार प्रत्येक मतदान स्थल पर मतदान अधिकारी द्वितीय के रूप में एक महिला कर्मचारी की नियुक्ति की गयी है। यद्यपि सामान्यत: मतदान स्थल पर आने वाले मतदाता को वास्तविक मतदाता माना जाता है। फिर भी इस अवधारणा को अकाटय नही कहा जा सकता है। यदि वहां पर विद्यमान परिस्थितियों में जैसे निर्वाचक नामावली में दी गयी निर्वाचक की आयु और उस व्यक्ति को देखकर उसकी पहचान सुनिश्चित  की जा सकने वाली आयु में अन्तर मालुम होने से कोई शंका उत्पन्न हो तो उसे मतदाता की सही-सही पहचान और वास्तविका के बारे में अपना समाधान कर लेना चाहिए। जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि ऐसी दशा में उसे केवल पहचान पर्ची प्रस्तुत करने से मतदाता की पहचान स्वीकार नही करना चाहिए और मामला पीठासीन अधिकारी को उसके विनिश्चय के लिए निर्दिष्ट कर देना चाहिए।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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