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ज़मानत पर रिहा सज़ायाफ्ता अपराधियों को हमेशा निगरानी में रखें: मण्डलायुक्त

छोटे-छोटे जुर्माने देकर बरी हो गए लोगों को दुबारा ऐसे अपराध करने से रोकना होगा -मंडलायुक्त 
आज़मगढ़ 6 नवम्बर -- मण्डलायुक्त के. रविन्द्र नायक ने अभियोजन कार्यों तथा लम्बित सिविल, राजस्व एवं फौजदारी वादों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि जो साज़ायाफ्ता अपराधी जमानत पर बाहर हैं उनकी ऐक्टिविटी पर लगातार नज़र रखी जाय। इसके साथ ही एनसीआर एवं अन्य माइनर ऐक्ट के वादों पर पूरी गंभीरता दिखायें ताकि बार-बार कानून तोड़ने की प्रवृत्ति को समाप्त किया जा सके। मण्डलायुक्त श्री नायक ने सोमवार को अपने कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित उक्त बैठक में कहा कि राजस्व के जो भी सरकारी वाद काफी पुरानी हो चुके हैं उनकी जोरदार पैरवी कर वादों को निर्णीत करायें। उन्होंने संयुक्त निदेशक अभियोजन को निर्देश दिया कि जिन-जिन न्यायालयों में वाद प्रचलित हैं उनसे सम्बन्धित अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं का पूर्ण विवरण उपलब्ध कराया जाय। उन्होेंने सभी सम्बन्धित अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं को निर्देशित किया कि जो भी मुकदमें निर्णीत हांे उसके निर्णय की प्रति एक सप्ताह के अन्दर जिलाधिकारी को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें ताकि वे अग्रिम कार्यवाही हेतु तत्परता से निर्णय ले सकें। मण्डलायुक्त ने कहा कि प्रायः आपराधिक मामलों विशेषकर संज्ञेय अपराधों की विवेचना समय से नहीं की जाती है, यह स्थिति अत्यन्त खेदजनक है। उन्होंने ऐसे प्रकरणों की विवेचना में तत्परता लाने का निर्देश दिया।
मण्डलायुक्त श्री नायक ने कहा कि एनसीआर तथा अन्य माइनर ऐक्ट में दोषी छोटे-छोटे जुर्माने देकर बरी हो जाते हैं तथा ऐसे लोग दुबारा एक प्रकार का अपराध करने में कोई झिझक महसूस नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधों को समाप्त करने के लिए यह जरूरी है कि इस पर भी पूरी गंभीरता दिखाई जाय। यदि कोई एक बार लोक अदालत में छोटे-छोटे जुर्माने भरकर छूट जाता है तो यह सुनिश्चित किया जाय कि दुबारा ऐसा करने पर उन्हें सिविल लाइबिलिटी का एहसास कराते हुए उन्हें जेल भेजने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाय। मण्डलायुक्त ने ग्राम सभा की जमीनों पर अवैध कब्जे के सम्बन्ध में कहा कि सम्बन्धित राजस्व कर्मियों द्वारा प्रायः रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है कि गांव सभा की जमीन पर कोई अवैध कब्जा नहीं है। जबकि प्रायः इस आशय का वाद एवं शिकायतें आ रही हैं कि अभी ग्राम सभा की अधिसंख्य भूमियों पर अवैध कब्जे बरकरार हैं तथा इस सम्बन्ध में न्यायालयों में रिट याचिकायें भी योजित की जा रही हैं कि वह अमूक भूमि पर बहुत पहले से ही काबिज दाखिल चले आ रहे हैं । उन्होंने इस सम्बन्ध में राजस्व कर्मियों का दायित्व निर्धारित करें तथा सम्बन्धित एसडीएम एवं तहसीलदार शुरूआती स्तर पर ही निस्तारण सुनिश्चित कराते हुए गांव सभा की जमीनों को अतिक्रमणमुक्त कराना सुनिश्चित करें। श्री नायक ने कहा कि जिन मुकदमों में निर्णय सरकार के पक्ष में नहीं आते हैं तो उसकी समीक्षा करें तथा कमियों को दूर करने की गुणात्मक कार्यवाही करें। उन्होेंने सभी शासकीय अधिवक्ताओं को निर्देश दिया कि जिन निर्णीत वादों की प्रति अभी तक जिला मजिस्ट्रेट को अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गयी है उसे तत्काल प्राप्त कर उपलब्ध करायें। उन्होंने फौजदारी के मामलों की समीक्षा के दौरान निर्देश दिया कि संज्ञेय अपराधों की विवेचना में तेजी लाई जाय तथा प्रभावी पैरवी करते हुए अपराधियों को जेल भिजवायें। इसके साथ ही उन्होने ऐसे मामलों में विवेचना में कदापि विलम्ब नहीं होना चाहिए। बैठक मंे गुण दोष के आधार पर अपील योग्य वादों मेें नियमानुसार प्रस्तावित अपीलों, राजस्व कार्यों आदि की भी समीक्षा की गयी।
इस अवसर पर अपर आयुक्त(प्रशासन) राजेन्द्र कुमार, अपर जिलाधिकारी(प्रशासन) आज़मगढ़ लवकुश कुमार त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक अभियोजन अजित कुमार सिंह, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी बेद प्रकाश वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक सहित सभी मण्डलीय एवं जनपदीय शासकीय अधिवक्तागण उपस्थित थे।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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