जौनपुर: वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 8 से 10 सितंबर तक तीन दिवसीय कार्यशाला के आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में है। इस कार्यशाला में देश के ख्यातिलब्ध वैज्ञानिक विश्वविद्यालय परिसर में विज्ञान एवं तकनीकी पाठ्यक्रम एवं शोध के विकास पर मंथन करेंगे। कुलपति प्रो डॉ राजाराम यादव ने बुधवार को बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में विज्ञान एवं तकनीकी से जुड़े विषयों के पाठ्यक्रम को प्रारंभ करने का प्रस्ताव इस कार्यशाला में तैयार होगा। विज्ञान के पाठ्यक्रमों में पढाई करने के लिए विद्यार्थियों को अन्य जगहों पर जाना पड़ता है। विश्वविद्यालय में यह पाठ्यक्रम नई दिशा तय करेंगें। जिसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों से वैज्ञानिक आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शोध के विकास के लिए पीएचडी धारकों के लिए पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप की शुरुआत की है। जिसके लिए एक करोड़ रुपए का वार्षिक बजट स्वीकृत किया गया है। यह देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय होगा जो अपने स्तर पर शोध शोधवृत्ति प्रदान करेगा। इससे शोधार्थी स्वतंत्र रुप से शोध करेंगे और इसका सीधा लाभ समाज को होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में ऐसे विज्ञान के नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी जो समाज के लिए उपयोगी होंगे। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में ऐसा पाठ्यक्रम प्रारूप बनेगा जो सीधे-सीधे क्षेत्र की जनता को लाभान्वित करें। नए पाठ्यक्रमों में एम एस सी भौतिकी, रसायन , गणित , पदार्थ विज्ञान ,भूविज्ञान, फ़ूड टेक्नोलॉजी लिए खाका खींचा जायेगा। फार्मेसी में डिप्लोमा, बीबीए, बीसीए, एम टेक कंप्यूटर विज्ञान, मकैनिकल, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के पाठ्यक्रमों पर मंथन होगा। होम्योपैथी एवं परंपरागत चिकित्सा की पढाई प्रारम्भ करने की भी योजना है। हमारा परंपरागत ज्ञान लुप्त हो रहा है जिसको आम जन तक पहुंचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास होगा। उन्होंने उन्होंने कहा कि जौनपुर में मूली और मक्का का उत्पादन बड़े स्तर पर होता है विश्वविद्यालय परिसर में फूड एवं तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित होगा तो इससे उत्पाद निर्मित होंगे और सहज लोगों को उपलब्ध हो सकेंगे. इससे किसानों को सीधा फायदा होगा। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्घाटन प्रख्यात वैज्ञानिक भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफ़ेसर कृष्ण लाल एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर बीके अग्रवाल बतौर विशिष्ट अतिथि भाग लेंगे। कार्यशाला में देश के 60 से अधिक वैज्ञानिक शामिल होगें। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ पीसी पातंजलि, प्रो नरेश चंद्र गौतम, प्रो पीयूष रंजन अग्रवाल को भी विश्वविद्यालय के विकास का खाका खींचने के लिए आमंत्रित किया गया है.
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