आजमगढ़। आठ दिनों तक बगैर परिजनों के जिला महिला चिकित्सालय में उपचाररत बेसुध गर्भवती किशोरी के चेहरे पर उस समय मुस्कान लौट आयी जब नारी शक्ति संस्थान के अथक प्रयास के बाद उसके परिजन उसे लेने अस्पताल पहुंचे। महिला थानाध्यक्ष की मौजूदगी में सुर्पुदीनामा बनाकर सोमवार को किशोरी को उसके परिजनों को सौंपा गया। विगत 28 अगस्त 2017 की रात में जिला चिकित्सालय से एक किशोरी को 108 एम्बुलेंस द्वारा राहुल सांस्कृत्यायन मंडलीय महिला चिकित्सालय में अचेतावस्था में भर्ती कराया गया। जैसे ही चिकित्सकों ने उसका परीक्षण किया तो मालूम हुआ कि वे लगभग छह माह के गर्भ से है और मानसिक स्थिति भी उसकी बेहद कमजोर थी। वह अपनों के बारे में कुछ भी बता पाने में असमर्थ थी। अगली सुबह जब इसकी जानकारी नारी शक्ति संस्थान की सचिव डा पूनम तिवारी को हुई तो वह महिलाओं के साथ महिला अस्पताल पहुंची। किशोरी की आपबीती समझने के बाद श्रीमती विजय लक्ष्मी मिश्रा, महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस एवं महिला थानाध्यक्ष से मुलाकात किया। इस दौरान संस्थान की महिलाओं ने कहा कि जब तक किशोरी के परिजन नहीं मिल जाते तब तक इसकी समस्त जिम्मेदारी नारी शक्ति संस्थान उठायेगी। इसके बाद नारी शक्ति संस्थान की उपाध्यक्ष अनामिका सिंह पालीवाल, संरक्षक विजयलक्ष्मी मिश्रा, महामंत्री अनीता द्विवेदी, मंत्री सुधा तिवारी प्रतिदिन अस्पताल पहुंचकर उसकी देखभाल करते रहे। इसी बीच एक महिला उपचार के लिए जब अस्पताल पहुंची तो गर्भावस्था में भर्ती किशोरी की पहचान अपने गांव के किशोरी के रूप में किया। नारी शक्ति संस्थान की सचिव डा पूनम तिवारी ने उक्त महिला द्वारा बताये गये गांव के आधार पर बिलरियागंज थानाध्यक्ष को सूचना दिया। थानाध्यक्ष ने तत्काल पीड़िता किशोरी का फोटो सचिव से मांगकर दो सिपाहियों को क्षेत्र के उक्त गांव में भेजा। सिपाहियों ने परिजनों की पुष्टि करने के बाद उन्हें लेकर महिला अस्पताल पहुंचे। जैसे ही किशोरी ने अपने परिजनों को देखा तो खुद उठी और अपने बाबू जी से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी। इस मिलाप को देख नारीशक्ति संस्थान की महिलाओं की भी आंखे नम हो गयी। इसके बाद नारीशक्ति संस्थान ने किशोरी व उसके परिजनों को लेकर शहर कोतवाली पहुंची जहां महिला थानाध्यक्ष एवं नारीशक्ति संस्थान की उपाध्यक्ष अनामिका सिंह पालीवाल, संरक्षक विजयलक्ष्मी मिश्रा, महामंत्री अनीता द्विवेदी, मंत्री सुधा तिवारी के समक्ष सुर्पुदीनामा बनाकर किशोरी को उसके भाई व पिता के साथ सोमवार की रात घर भेज दिया गया। इस बावत संस्थान की डा पूनम तिवारी ने कहा कि आठ दिनों पूर्व ही हमने आश्वस्त कर दिया था कि किशोरी के परिजनों के न मिलने तक संस्थान इसकी जिम्मेदारी उठायेगा लेकिन सोमवार को जैसे ही किशोरी ने अपने परिजनों को देखा मानो बुत के अंदर जान आ गयी। हम आठ दिनां से किशोरी से बातचीत करने का लगातार प्रयास कर रहे थे लेकिन सोमवार को परिजनों को देख इसे खुद संजीवनी मिल गयी। किशोरी के विदाई के दौरान महमंत्री अनीता द्विवेदी, मंत्री सुधा तिवारी ने इसके परिजनां को इसके स्वास्थ्य की देखभाल हेतु सचेत भी किया और इस घटना में सभी सहयोग करने वाले साथियों का आभार जताया। इस मौके पर महिला थानाध्यक्ष कल्पना मिश्रा, प्रभारी चिकित्साधिकारी डा विनय कुमार सिंह, डा डीपी तिवारी सहित आदि मौजूद रहे।
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