आजमगढ़ : समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ में अब सत्ता परिवर्तन का पूरा असर दिखने लगा है , सांसद मुलायम सिंह यादव के क्षेत्र में सपा के कब्जे वाली जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। पिछले कई दिनों से चल रही सुगबुगाहट के बीच आखिरकार मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य प्रमोद यादव के नेतृत्व में लगभग चार दर्जन सदस्य वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष मीरा यादव के विरोध में आगे आ गए हैं। यही नहीं प्रमोद यादव के नेतृत्व में इन सदस्यों ने मंगलवार को प्रभारी डीएम मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह को अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में लामबंद सदस्यों की सूची सौंप कर जनपद भर में हड़कंप मचा दिया। इस मामले में प्रभारी जिलाधिकारी ने कहा कि पेश किए गए हस्ताक्षरयुक्त अविश्वास प्रस्ताव के पत्रक का सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद ही अविश्वास प्रस्ताव पर चुनाव कराने की तिथि निर्धारित की जाएगी। गौरतलब है की आजमगढ़ जिला पंचायत में कुल 86 सदस्य हैं। वर्ष 2015 में सपा प्रत्याशी के रूप में मीरा यादव जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुई थी। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद से ही मीरा यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जिला पंचायत सदस्यों में सुगबुगहाट शुरू हो गई थी। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष के मुद्दे को ले कर ही सपा छोड़ चुके प्रमोद यादव ने अगुवाई की है और अब उनके नेतृत्व में मीरा यादव के खिलाफ आधे से अधिक जिला पंचायत सदस्य तेजी के साथ लामबंद हो गए दिख रहे हैं । इधर प्रभारी डीएम ने कहा कि उन्होंने जिला पंचायत सदस्यों की ओर से सौपे गए पत्रक का सत्यापन कराने के लिए पंचायत निर्वाचन में भेज दिया है । सत्यापन के बाद वे अविश्वास प्रस्ताव पर बहस व चुनाव कराने की तिथि निर्धारित करेंगे। पूरे घटनाक्रम से बाद जिला पंचायत सदस्य प्रमोद यादव ने दावा किया कि उनके साथ लगभग 05 दर्जन से ज्यादा जिला पंचायत सदस्य समर्थन में हैं। उक्त सभी जिला पंचायत सदस्य अविश्वास प्रस्ताव पर चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। दावा किया की जरूरत पड़ने पर सभी सदस्य उनके साथ मौजूद रहेंगे। वहीँ सूत्रों के अनुसार सपा जिलाध्यक्ष ने अविश्वास कहा कि प्रमोद यादव के नेतृत्व में जितने सदस्यों का हस्ताक्षर युक्त पत्रक प्रभारी डीएम को सौपा गया है उनमें अधिकतर सदस्यों का हस्ताक्षर फर्जी है। सत्यापन के बाद ही पता चल जाएगा कि कितने फर्जी सदस्य ने हस्ताक्षर किया है। दावा किया की मीरा यादव की कुर्सी को कोई ख़तरा नहीं है।
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