आजमगढ़ : निजामाबाद तहसील के बकियां लछिरामपुर गांव में गरीब किसान के घर जन्में बृजेश यादव को नेफ्रोलॉजी विभाग में प्रो. नारायन प्रसाद के निर्देशन में गुर्दा प्रत्यारोपण रीजेक्शन पर शोध करने के लिए डॉक्ट्रेट की डिग्री दी गई। उनकी इस सफलता से परिवार ही नहीं बल्कि गांव के लोग भी गदगद है। बृजेश का मानना है कि लक्ष्य का निर्धारण कर आगे बढ़ा जाय तो कोई काम कठिन नहीं है। डॉ. बृजेश अपनी मेहनत के बल पर सिनसिनाटी चिल्ट्रेल मेडिकल हॉस्पिटल अमेरिका में शोध कर रहे हैं। दीक्षांत समारोह में भाग लेने के लिए पीजीआइ पहुंचे डॉ. ब्रजेश ने किडनी ट्रांसप्लांट को सफल बनाने की तकनीक को लेकर कई बायोमार्कर का पता लगाया है। इनके सात शोध पत्र इंटरनेशनल जर्नल में स्वीकार किए गए हैं। बृजेश ने आजमगढ़ के सरकारी स्कूल बीनापारा इंटर कॉलेज से हाईस्कूल, डीएवी इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट व पूवांर्चल विवि से एमएससी (गोल्ड मेडलिस्ट) करने के बाद पीजीआइ में पीएचडी कर रहे हैं। वह नेट की परीक्षा पास कर स्कॉलरशिप के जरिए शोध कर रहे हैं। मेधावी ब्रजेश के पिता नंदलाल यादव खेती करते हैं। चार बीघा जमीन है, जिस पर लंबा परिवार निर्भर है। रोटी भी बड़ी मुश्किल से मिलती है। बृजेश चार भाई दो बहन हैं। उनका मानना है कि लगन और निष्ठा से सब कुछ हासिल हो सकता है। अमेरिका से एक हफ्ते के अवकाश पर आजमगढ़ आये बृजेश ने अपनी सफलता के श्रेय परिवार के साथ मित्रों को दिया। उन्होंने कहा कि युवा पहले लक्ष्य निर्धारित करे इसके बाद आगे बढ़े। आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष एसके सत्येन, नितिन कुमार, देवेंद्र पांडेय, भाजपा महामंत्री बृजेश यादव आदि ने डा. बृजेश को सफलता के लिए बधाई दी।
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