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सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से मुस्लिम महिलाओं में खुशी

आजमगढ़। तीन तलाक प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय की 5 जजों की संवैधानिक पीठ के मंगलवार को आये फैसले पर जनपद की तीन तलाक से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं व उनके परिवारों में खुशी का परावार नहीं रहा। लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी प्रसन्नत प्रकट की। नरेन्द्र मोदी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सैय्यद काजी अरशद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सदियों से तीन तलाक की गुलामी से मुस्लिम महिलाओं को इस फैसले से आजादी मिली है। इनके जीवन में नये युग का सूत्रपात हुआ है। किसी शादी शुदा मुस्लिम महिला को तलाक-तलाक-तलाक कहकर कोई शौहर किसी भी उम्र में किसी भी वक्त उसे अपनी जिन्दगी, सम्पत्ति व सुख-दुख से बेदखल नहीं कर सकेगा, जिसकी पीड़ा सिर्फ व सिर्फ मुस्लिम महिलाओं को ही सहना पड़ता था। सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का असंवैधानिक घोषित कर मुस्लिम महिलाओं का नया जीवन दिया है। श्री काजी ने इस आजादी के लिए मुस्लिम महिलाओं के संघर्ष और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के योगदान की सराहना करते हुए सारा श्रेय केन्द्र सरकार और भारत के सर्वोच्च न्यायालय को दिया है। लॉ ग्रेजुएट श्वेता पाण्डेय ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहाकि इस फैसले से मुस्लिम समाज की आधी आबादी के हक की सुरक्षा हुई है। इससे उनमें जहाँ आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे स्वावलम्बी हो जाएँगी । यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा। यह युवा पीढ़ी के लिए शुभ संकेत है। यास्मीन बेगम कहती है कि फैसला बहुता अच्छा है। मुस्लिम महिलाओं हार्दिक इच्छा होती है कि निकाह के बाद कोई भी औरत अपने शौहर से मौत के बाद ही अलग होना चाहती है लेकिन तीन तलाक की रवायत उनकी इच्छाओं को मार देती है। उसे पूरे जीवन अपनी इच्छाओं के टूटने का भय बना रहता है। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के दंश से मुक्ति मिली है। भारत रक्षा दल के अफजल अहमद ने फैसले को सही बताते हुए कहाकि कानून सबके लिए समान होना चाहिए। मुस्लिम समाज में सुधार का रास्ता प्रशस्त होगा। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के शोषण उत्पीड़न से मुक्ति मिलेगी।




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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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