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लड़का-लड़की में फर्क करने से ही जनसंख्या बढ़ रही है-सीएमओं

24 जुलाई तक चलेगा जन संख्या स्थिर पखवारा
आजमगढ़। विस्फोटक हो रही जनसंख्या को स्थिर करने के लिए आगामी 24 जुलाई तक जन संख्या स्थिर पखवारा आयोजित किया जायेगा। जिसके अन्तर्गत परिवार को नियोजित करने वाली समस्त स्थायी एवं अस्थायी विधियों से प्रचार-प्रसार,नसबन्दी कैम्प, प्रदर्शनी/मेला आयोजित किया जायेगा। उक्त जानकारी सीएमओ डा. एसके तिवारी ने दी। अपने सभागार में आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए उन्होने बताया कि इस पखवारें में 225 महिला नसबन्दी, 30 पुरूष नसबन्दी तथा 300 आई.यू.सी.डी. का लक्ष्य निर्धारित है। उन्होने सभी  ब्लाक कोआरडिनेटर को निर्देशित किया कि इस पखवारे के लिए निर्धारित थीम-नई लहर नया विश्वास। सम्पूर्ण जिम्मेदारी से परिवार विकास के अनुरूप दम्पत्तियों से सम्पर्क करे तथा अधिक से अधिक लोगों को परिवार नियोजन की विधि अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होने कहा कि इस पखवारें में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के डा. एवं स्टाफ, आशा, आंगनवाड़ी, एएनएम के साथ मिल कर संयुक्त अभियान संचालित करना है। मेला एवं प्रदर्शनी के साथ-साथ धर्म गुरू सम्मेलन आयोजित कराये तथा कार्यालय में कन्डोम बाक्स रखें। प्रत्येक माह की 21 तारिख को पुरूष नसबन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है परन्तु अभी तक वित्तीय वर्ष में 3 माह बितने के बाद भी कोई केस नही कराया गया है। उन्होने बताया कि पुरूष नसबन्दी में नस का काटा नही जाता है बल्कि बांधा जाता है। इससे कोई कमजोरी भी नही होती है। उन्होने कहा कि लड़का एवं लड़की में फर्क करने से ही जनसंख्या बढ़ रही है। इसके लिए दम्पत्ति को प्रेरित करने की आवश्यकता है कि लड़के एवं लड़की में फर्क न करें। लड़कियों भी लड़कों की तरह कार्य कर सकती है। विवाह के समय लड़की की उम्र 18 से कम न हो तथा लड़के की उम्र 21 से अधिक होनी चाहिए। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 वाईके राय ने कहा कि गर्भ धारण रोकने के लिए इमरजेन्सी पिल्स भी मार्केट में उपलब्ध है। इसका सेवन केवल गर्भ  धारण की आशंका होने पर किया जाना चाहिए, नियमित रूप से नही। नियमित रूप से ओरल पिल्स ले सकते है। डिप्टी सीएमओ डा.संजय ने बताया कि सभी  ब्लाक कोआरडिनेटर नसबन्दी कराने वाले महिला एवं पुरूष की सूची तैयार रखे। 30 से अधिक केस होने पर एक अतिरिक्त सर्जन भेजा जायेगा। उन्होने बताया कि पुरूष नसबन्दी के लिए 3 हजार रू0 तथा महिला नसबन्दी को 2 हजार रू0 लाभार्थी को दिये जाते है। डिलेवरी के तुरन्त बाद नसबन्दी कराने पर महिला को 3 हजार रू0 दिये जाते है। कार्यशाला में डा0 आरती, पूनम शुक्ला तथा अन्य स्वंय सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहें।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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