आजमगढ़: सीएम योगी का आजमगढ़ से गहरा नाता है तो उन्हें लेकर विवाद भी कम नहीं है। वर्ष 2017 में भाजपा के यूपी की सत्ता में आने के बाद उन्हें सीएम भले ही बना दिया गया हो और सीएम बनने के बाद वे सर्व समाज के हित की बात कर रहे हो लेकिन आज भी अल्पसंख्यकों के बीच उनकी छवि एक कट्टर हिंदू नेता की है। जो हमेशा ही अल्पसंख्यकों के खिलाफ रहा है। वैसे तो योगी आदित्यनाथ ने बतौर भाजपा सांसद एवं महंत के रूप में आजमगढ़ की कई यात्राएं की है। इस दौरान उन्होंने हमेशा हिंदू हितों की रक्षा की बात की और वर्ष 2008 में उनके उपर तकिया पर जानलेवा हमला भी हुआ। प्रशासन ने हर बार यात्रा के दौरान उन्हे तकिया क्षेत्र से दूर रखने का प्रयास किया। जब भी योगी इस रास्ते आना चाहे प्रशासन ने अंमित समय में रूट बदल दिया लेकिन इस बार वे आजमगढ़ यूपी के सीएम की हैसियत से आ रहे है। ऐसे में यह चर्चा जोरो पर हैं कि अगर सीएम मंडल अस्पताल जायेगें तो रास्ता कौन सा होगा। क्या वे तकिया होकर जाएगे या फिर प्रशासन पहले की तरह उन्हें दूसरे रूट से ले जायेगा। बता दें कि योगी आदित्य नाथ ने आजमगढ़ में पहली यात्रा दो दशक पहले चितारा महमूदपुर में हुए सांप्रदायिक विवाद के बाद गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैधनाथ के उत्तराधिकारी के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने कई यात्राएं की। समय के साथ उनकी छवि कट्टर हिदू नेता की बनती गई। खास तौर पर हिंदु युवा वाहिनी के अस्तित्व में आने के बाद उन्हें पूरी तरह कट्टर हिंदू नेता मान लिया गया। वर्ष 2003-04 में शिब्ली कालेज के छात्र नेता अजीत राय की हत्या के बाद हुए उपद्रव के दौरान योगी आदित्यनाथ आजमगढ़ पहुंचे तो प्रशासन ने उन्हें शहर में घुसने नहीं दिया। बार्इपास से ही उन्हें वापस लौटा दिया गया। इसके बाद वर्ष 2007 में गोरखपुर दंगे में उन्हें आरोपी बनाया गया। 7 सितंबर 2008 को बतौर बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ आजमगढ़ के डीएवी मैदान में हिन्दू महासम्मेलन की सभा को संबोधित करने आ रहे थे। उस समय प्रशासन चूक से योगी का काफिला हर्रा की चुगी से दलालघाट होते हुए सीधे डीएवी मैदान न पहुंच कर सीधे मुकेरीगंज होते हुए तकिया पहुंच गया । उस समय योगी के काफिले पर तकिया मोहल्ले में पथराव के बाद हमला हुआ। इस दौरान हुई फायरिंग में एक युवक की मौत भी हो गई थी । इसके बाद भड़के तनाव में कई जगह मारपीट की घटनाए हुए। एसपी को निलंबित कर दिया गया था। वहीं मृतक पक्ष के लोगों ने योगी आदित्यनाथ पर हत्या का आरोप लगाया था। इसके बाद उलेमा कौंसिल कार्यकर्ता की हत्या के आरोप में जेल गये भाजपा सांसद रमाकांत यादव से मिलने योगी आजमगढ़ आये। चुनाव के दौरान उन्होंने आजमगढ़ की कई यात्रा की लेकिन कभी वे तकिया के रास्ते से नहीं गए। या यूं कह सकते हैं कि प्रशासन ने हमेशा उन्हें बाइपास से ही कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने को प्रबंध किया। अब योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। सीएम बनने के बाद उनकी जिम्मेदारियां बढ़ी है। योगी ने कट्टर नेता की छवि से इतर लगातार यह बताने का प्रयास किया है कि वे सर्व समाज के साथ है। सबका साथ सबका विकास के एजेंडे पर ही वे आगे बढ़ रहे है। उनकी आजमगढ़ यात्रा को कई लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में हर किसी के दिलो दिमाग में एक ही सवाल है कि क्या सीएम योगी अगर मंडल अस्पताल जायेगे तो तकिया के रास्ते जाएंगे। क्या वे तकिया पर रूककर वहां के लोगों को यह बताने का प्रयास करेंगे कि वे उनके साथ है। बहरहाल चौबीस घंटे में या फिर प्रोटोकाल आने के बाद स्थित साफ हो जाएगी लेकिन उत्सुक हर कोई है कि सीएम का फैसला क्या होगा।
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