आजमगढ़ : जिसका डर था वहीं हुआ, पिछले कई दिनों से सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद बनाने में जुटा प्रशासन एक मौके पर फेल हो गया। जिला महिला अस्पताल का निरिक्षण कर अस्पताल गेट से बाहर निकलते समय वेतन न मिलने से परेशान आशा कार्यकत्रियों ने सारी सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए सीएम के काफिले के आगे आ गई, जिसके कारण सुरक्षा कर्मियों में भारी अफरातफरी मच गई। एसपीजी और डीआईजी ने किसी तरह महिला को सीएम के वाहन के आगे से हटाया। तब तक हंगामे के दौरान सीएम योगी ने अपनी गाड़ी रोकी और अन्य आशा बहुओं का ज्ञापन लिया तब जाकर मामला शान्त हुआ। हुआ यूं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेहरूहाल में पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद महिला अस्पताल के निरीक्षण के लिए रवाना हुए। महिला अस्पताल का निरिक्षण कर अस्पताल गेट से बाहर निकलते समय अभी वे बड़ा देव मंदिर के पास पहुंचे थे कि एक आशा कार्यकत्री यह कहते हुए कि छह महीने से वेतन नहीं मिला है जान दे दूंगी। सीएम के काफिले के वाहन के आगे खड़ी हो गई। फिर क्या था डीआईजी से लेकर सीएम सुरक्षा में लगे लोगों तक मानो पूरा प्रशासन हाफने लगा। डीआईजी उदयराज जायसवाल और सीएम सुरक्षा के जवान वाहनों से कूदकर बाहर निकले और महिला को हटाने का प्रयास किये तो वह उनसे भिड़ ही गई। एसपीजी के जवान ने महिला के किसी तरह सड़क से हटाया लेकिन वह फिर सड़क पर आ गई। करीब 05 मिनट की उठापटक के बाद किसी तरह महिला को हटाया जा सका। सबसे अहम बात है कि सीएम के जिले में होने के बाद रास्ते में कहीं भी महिला अस्पताल के पास महिला पुलिसकर्मी तैनात नहीं की गई थी। जिसके कारण महिला को हटाने में पुलिस को और भी फजीहत झेलनी पड़ी। महिला ने पुलिस पर आपत्तिजनक तरीके से व्यवहार करने का आरोप लगाया। आशा बहु शुभावती ने जब सीएम का वाहन रोका। विभा राय व मीनू भारती ने मौके का फायदा उठा उन्हें पत्रक सौंप दिया। बहरहाल जो भी था लेकिन सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चूक हो सकती थी।
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