आजमगढ़ : जन संस्कृति मंच द्वारा स्मरणः कवि त्रिलोचन एंव मुक्तिबोध श्रृखंला के अंतर्गत शिब्ली एकेडमी में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। त्रिलोचन एवं मुक्तिबोध के जन्मशताब्दी वर्ष पर आयोजित यह कार्यक्रम दो सूत्रों में विभाजित था। पहले सत्र में मुक्तिबोध एवं त्रिलोचन के जीवन और कविता पर बातचीत हुई। इसमें बोलते हुए समकालीन जनमत के प्रधान संपादक राम जी राय ने कहा कि मुक्तिबोध की कविताएं विचारों और अनुभवों की जटिलता के चलते धीरज की मांग करती हैं। मुक्तिबोध ने अपने समय की समस्त चीजों को बड़े करीने से अपनी कविता में व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मुक्तिबोध ने कविता के सौन्दर्यशास्त्र को बदल दिया। जो चांद कविता में सौन्दर्य बोध का प्रतीक है, वह मुक्तिबोध के यहां अपने टेढ़े मुुंह के साथ है। इतना ही नहीं उन्होंने सत चित आनंद की जगह सतचित वेदना को स्थापित किया। मुक्तिबोध परिवर्तन की छटपटाहट और उसकी अनिवार्यता के कवि हैं। मुक्तिबोध की कविताओं में नये भारत की खोज है। उन्होंने यह भी कहा कि मुक्तिबोध सत्ता के बुनियादी चरित्र को समझते है और संशय के पार जा कर कविताएं रचते हैं। मुक्तिबोध ने मार्क्सवाद को अद्यतन किया। प्रो0 चौथीराम यादव ने कहा कि मुक्तिबोध बड़ा स्वप्न रखने वाले बड़े कवि हैं। वे कबीर की परम्परा से जुड़ते है। वे मार्क्सवाद प्रतिवद्धता के साथ जीने वाले कवि हैं। सुभाष चंद्र कुशवाहा ने त्रिलोचन से जुड़े संस्मरण साझा किये। उन्होंने कहा कि उर्दू- हिन्दी शब्दकोश बनाने में त्रिलोचन का योगदान है। भाषा के वे अद्भुत जानकार थे। कार्यक्रम में उदयभान यादव, कल्पनाथ यादव ने भी अपनी बात रखी। अध्यक्षता बद्रीनाथ एवं संचालन रमेश मौर्य ने की दूसरा सत्र काव्य पाठ का था। इसमें बनारस से आये गीतकार प्रकाश उदय, जौनपुर से अहमद निसार, अजय कुमार, धूमकेतु के साथ आजमगढ़ के कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया।
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