जौनपुर: वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्विद्यालय, जौनपुर के वित्तीय अध्ययन विभाग में एक दिवसीय छात्र संगोष्ठी विषयक "फाइनेंसियल इन्क्लूसन इनिसिएटिव इन इंडिया, अ वे फॉरवर्ड " का आयोजन किया गया । संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य वित्तीय समावेशन के बारे में चर्चा करना और भारतीय परिदृश्य में इसकी स्थिति की समीक्षा करना था। संगोष्ठी में 75 प्रतिभागीओं ने हिस्सा लिया जिसमे छात्र छात्राओं द्वारा लगभग एक दर्जन शोध पत्र भी प्रस्तुत किये गए । इससे पहले कार्यक्रम में समस्त अतिथियों का स्वागत विभाग की छात्रा व कार्यक्रम की संयोजक कुमारी अंकिता श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में वक्ता के रूप में विभाग के प्राध्यापक मो० अबू सलेह ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य लोगों को वित्तीय सेवाओं से जोड़ना है जिससे न केवल सरकार अपनी वित्तीय सेवाएं लोगों को बेचकर धन अर्जित कर उसे कल्याणकारी योजनायें बना कर लोगों को अंतिम रूप से दिया जा सके। दूसरे वक्ता के रूप में विभाग के प्राध्यापक श्री सुशील कुमार ने कहा कि पहले वित्तीय सेवाएं केवल अमीर लोगो के लिए होती थी मगर वित्तीय समावेशन के कारण आज कई वित्तीय सेवाएं गरीब लोगो को भी मुहैया कराई जा रही है। आज भी देश के केवल 50 प्रतिशत लोग ही वित्तीय सेवाओं का फायदा उठा रहे है। विभाग के प्राध्यापक श्री अलोक गुप्ता ने कहा कि पैसे से ही पैसा बनता है अर्थात यदि भारत देश को आर्थिक रूप से और मजबूत होना है तो लोगों की बचत को निवेश में बदलना होगा। जैसा कि हम जानते है कि भारत में बहुत सारे लोगो के पास बैंक खाता ही नहीं है और उनका पैसा मुद्रा बाज़ार में है ही नहीं इससे भारत को दूरगामी आर्थिक नुक्सान हो रहा है और हम वित्तीय सेवाओं में जितना विलम्ब करेंगे देश को उतना ही आर्थिक नुक्सान होगा। अध्यक्षीय संबोधन में डा० अजय द्विवेदी ने कहा कि भारत में वित्तीय समावेशन कोई नयी विचारधारा नहीं है। यह अवधारण ब्रिटिश राज के दौरान भी थी बस उस समय यह व्यवस्था मान्यता प्राप्त नहीं थी और आजादी के बाद भारत ने इस व्यवस्था को कोडीफाई कर दिया है। भारत ने अपनी नई आर्थिक निति जो 1991 में अपनाया था उसमे भी वित्तीय समावेशन को विस्तारपूर्वक चर्चा की गई थी जिसका परिणाम आज धीरे धीरे दिखने को मिल रहा है परन्तु अभी भी बहुत ज्यादा कार्य करने की संभावनाएं है। अगर देश को विश्व की महाशक्तियों में अपना नाम दर्ज कराना है तो वित्तीय समावेशन ही उसका सर्वोपयुक्त माध्यम है। संगोष्ठी में अंकिता साहू, अंकिता श्रीवास्तव, अनुराग उपाध्याय, आशुतोष जैसवाल, मनीष अग्रहरी, मो० शारिक, रीमा यादव, शहबाज़, अभिषेक तिवारी, शिखा दुबे, सुशील कुमार यादव इत्यादि ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये। कार्यक्रम का सञ्चालन शिखा दुबे एवं मनीष अग्रहरी ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन शहबाज़ ने किया। इस कार्यक्रम का आयोजन वित्तीय अध्ययन विभाग द्वारा एम०एफ०सी० एग्जीक्यूटिव क्लब के बैनर तले किया गया। इस मौके पर डा० राजकुमार सोनी, डा० आशुतोष कुमार सिंह, डा० इन्द्रेश कुमार, नितिन, ऋतू श्रीवास्तव, रोहित चौबे, अभिषेक मौर्या, जैसमीन बानो, रुपाली, पूजा आदि उपस्थित रहे।
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