आज़मगढ़: 14 सितम्बर 2016: अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि जिला कारागार, आजमगढ़ में निरूद्ध विचाराधीन बन्दी चन्द्रशेखर पुत्र लालजी मुसहर निवासी मनिया, थाना गहमर, जिला गाजीपुर उम्र 24 वर्ष, विचाराधीन बन्दी जितेन्द्र मुसहर पुत्र देवनाथ मुसहर निवासी अगस्ता, थाना नन्दगंज, जिला गाजीपुर उम्र 20 वर्ष, विचाराधीन बन्दी प्रकाश पुत्र बद्धन मुसहर निवासी महारे उर्फ महाहर थाना मरदह, जिला गाजीपुर उम्र 32 वर्ष कारागार के हाता संख्या-5 के बैरक सं0-5सी में बन्द होते थे। 18 अगस्त 2016 कां उक्त तीनों बन्दी दवा लेने के बहाने बैरक से बाहर निकले। शाम को जेल बन्द होने की प्रक्रिया चल रही थी। उसी समय ये तीनों बन्दी पाकशाला गैस गोदाम से दीवाल में लगी गैंस की पाइप निकालकर और पकाशाले में प्रयोगार्थ पल्टे को मोड़कर और उसे मेनवाल की दीवाल में फंसाकर सांय काल लगभग 7.00 से 7.30 बजे के बीच कारागार के मेनवाल से पलायन करने में सफल रहें। उक्त तीनों बन्दियों के पलायन की सूचना तत्काल टेलीफोन के माध्यम से अपर पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं , उ0प्र0 लखनऊ, उप महानिरीक्षक कारागार, गोरखपुर परिक्षेत्र गोरखपुर, जिला मजिस्ट्रेट महोदय आजमगढ़ एवं पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ को सूचित किया गया तथा साथ ही शासन, उ0प्र0, लखनऊ, महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उ0प्र0 लखनऊ, उप महानिरीक्षक, कारागार, गोरखपुर परिक्षेत्र गोरखपुर, समस्त जिलाधिकारी/पुलिस अधीक्षक एवं समस्त वरिष्ठ जेल अधीक्षक/अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस अधीक्षक, आजमगढ़ को बंदी के पलायन कर जाने की सूचना एवं प्राथमिकी की रिपोर्ट प्रेषित की गयी। काफी तलाश के बाद उनका पता न चलने पर वरिष्ठ अधीक्षक, जिला कारागार आजमगढ़ द्वारा अपने उक्त पत्र के माध्यम सेे तीनों विचाराधीन बन्दियों के पलायन किये जाने के प्रकरण की मजिस्ट्रीयल जांच हेतु किसी मजिस्ट्रेट को नामित करने का अनुरोध किया गया है। तत्क्रम में जिला मजिस्ट्रेट के आदेश 03 सितम्बर 2016 द्वारा संदर्भित प्रकरण की मजिस्ट्रीयल जांच हेतु अपर जिला मजिस्ट्रेट (वि/रा0) आजमगढ़ को नामित किया गया है। तथा उन्होने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट महोदय के उपर्युक्त आदेश 03 सितम्बर 2016 के क्रम में जांच अधिकारी से अपेक्षा की जाती है कि उक्त घटना की मजिस्ट्रीयल जांच तत्काल प्रारम्भ कर दें। जांच की सभी प्रक्रिया अपनाते हुए जांच 15 दिवस में पूर्ण कर जांच की परिणाम आख्या चार प्रतियों में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
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