आजमगढ़: हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आजमगढ़ फाइन आर्ट सेंटर के महिला कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से रंगों से हिंदी के वर्णमाला बना कर हिंदी के प्रति अपने प्रेम को जाहिर किया , इसमें कई नन्हें मुन्हें कलाकार भी शामिल हुए । आजमगढ़ फाइन आर्ट सेंटर जनपद में महिला कलाकारों को उनकी सृजनधर्मिता के विकास में पिछले कई सालों से अपनी एक अलग पहचान बना लिया है। जनपद की कई विभूतियों को इस सेंटर के कलाकार अपनी कला से कैनवास पर उतार चुके है। सिने तारिका शबाना आज़मी इन महिला कलाकरों की कृतियों की तारीफ भी कर चुकी है। सेंटर की निदेशिका डॉ लीना मिश्रा ने कहा क़ि हमारे कलाकार दृश्य के माध्यम से अपनी बात कहते है दृश्य हमारी भाषा है और आज हिंदी दिवस के पूर्व संध्या पर कलाकारों द्वारा विभिन्न रंगों से निर्मित यह वर्णमाला हिंदी को सम्मान देने के लिए है। आज कलाकारों ने हिंदी के अक्षरों को रंगों से बना कर अपना हिंदी के प्रति प्रेम प्रदर्शित किया है। कलाकारों का उत्साहवर्धन करने पहुचें वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के प्राध्यापक डॉ दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि हिंदी दिवस के पूर्व संध्या पर महिला कलाकारों ने हिंदी के अक्षरों को सिर्फ बनाया नहीं है बल्कि हिंदी के सामाजिक जुड़ाव का एक बड़ा सन्देश दिया है। हिंदी बोलने में हमें गर्व महसूस करना चाहिए। इस अवसर पर वैश्विक स्तर पर हिंदी की दशा पर श्री ग़ांधी स्मारक पी जी कॉलेज मालटारी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ कौशलेंद्र मिश्र ने अपनी बात रखी। इस अवसर पर अंकिता सिंहा, साक्षी पांडेय, शिवांगी वर्मा, सोनाली अग्रवाल, दीक्षा, तान्या, वंशिका सेठ, प्रतीक्षा, नंदिनी, अदिती, आस्था, लावण्या, सुहानी, संचिता,माधवी आदि कलाकार भाग लिए।
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