आजमगढ़. : निजामाबाद थाना क्षेत्र के चकिया गांव की एक विवाहिता इसलिए अपने विकलांग पति को छोड़ मायके चली गयी क्योंकि उसके घर में शौचालय नहीं था। अब वह शौचालय बनने के बाद ही घर वापस लौटने की जिद पर अड़ी है। घर पर छोटी सी दुकान चलाकर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने वाला विकलांग इस स्थित में नहीं है कि शौचालय बनवा सके। सेक्रेटरी और ब्लॉक के अधिकारी उसका दर्द समझने के लिए तैयार नहीं हैं। वे कहते है शौचालय के लिए बजट ही नहीं है। आपके बता दे कि उक्त गांव निवासी मिस्टर पुत्र इस्लाम एक पैर से विकलांग है। पहले वह अपने भाई परवेज के साथ एक ही घर में रहता था। जिसमें शौचालय बाथरूम उपलब्ध था। आठ माह पूर्व परवेज विदेश से कमाकर लौटा तो घर बनवाया इसके बाद दोनों भाइयों में बटवारा हो गया। बटवारे में शौचालय और बाथरूम परवेज के हिस्से में चला गया। मिस्टर को सिर्फ दो कमरे मिले। छह माह पूर्व परवेज विदेश चला गया। इसके बाद उसकी पत्नी ने मिस्टर की पत्नी को शौचालय के उपयोग से रोक दिया। मिस्टर की पत्नी लगातार उसपर शौचालय के लिए दबाव बनाती रही लेकिन वह इतने धन की व्यवस्था नहीं कर सका कि शौचालय बनवा सके। कारण कि मिस्टर के पास रोजगार के नाम पर घर में ही एक छोटी सी बिस्कुट और टाफी की दुकान है जिसके बीबी और एक बच्चे का खर्च उठाना ही उसके लिए भारी था। शौचालय न बनने से नाराज मिस्टर की पत्नी एक पखवारा पूर्व पति को छोड़कर मायके चली गयी। मिस्टर कई बार उसे लाने का प्रयास किया लेकिन उसका कहना है कि जबतक शौचालय नहीं बनेगी वह वापस नही लौटेगी। शौचालय के लिए गरीब ने ग्राम विकास अधिकारी गौरी शंकर से गुहार लगायी लेकिन उन्होंने धन न होने का बहाना बनाकर मामले को टाल दिया। वहीं खंड विकास अधिकारी भी इस ममाले में चुप्पी साधे हुए है। स्थित यह है कि शौचालय के लिए एक परिवार टूटता दिखाई दे रहा है।
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