आजमगढ़। जनपद के अवंतिकापुरी में ऐतिहासिक धरोहरों की खोज में एक और धरोहर मिली है। पुरातत्वविभाग को भेज कर इसकी प्रमाणिकता को प्रमाणित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस बार एक टीले के उपर दुर्लभ कुए की चंद्राकार दीवार,मिटटी के मनके और खण्डित प्रतिमा पाई गयी है। पुरातत्व विभाग की जाचांपरांत ही यह किस शताब्दी का है प्रमाणित होगा। रानी की सराय क्षेत्र के अवतिकापुरी धाम में एक लम्बें अर्से से खुदाई से लेकर अब तक कई धरोहरो को सहेजने वाले और पुरातत्व विभाग के सहयोग से एक-एक कर अवशेष एकत्रित करने वाले दयानंद विश्वकर्मा और रूपचंद को उचा गांव में भी खोज के बाद कई रहस्य दिखे तो उसे एकत्रित करना शुरू कर दिया। इस बार गांव के एक हिस्से में जहां टीला जैसाएक कुआं मिला है। कुए के अंदर की दीवार चन्द्रकार और वह भी पत्थर की है। शिक्षकों का मानना है कि कुए में ईट की दीवार तो मिलती है लेकिन पत्थर की पहली बार दिख रही है। एक जगह खण्डित प्रतिमा मिली है। वही एक हिस्से में सुपारी आकार की काली तथा लाल पालिंश के मिटटी के मनके भी मिले है। बर्तन के टुकडे में दौडता हिरन की आकृति भी मिली है। शिक्षक के मुताबिक मिले अवशेषो को सहेज कर रखा गया है शीघ्र ही पुरातत्व विभाग को भेज कर पता लगायेगे कि यह किस युग का है। वैसे यह मिले अवशेष प्राचीन है। अवतिकापुरी से जुडे है-शिक्षक दयांनन्द की माने तो क्षेत्र के कई हिस्से इस धाम से जुडे रहे है। आस पास का क्षेत्र तकरीबन 30 किमी की परिधी में उससे जुडा है। उंचा गांव भी मिले अवशेष से यह इंकार नही किया जा सकता है।
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