बूढ़नपुर (आजमगढ़) : अतरौलिया के शेरवां गांव में मुर्गे का बासी मीट खाने से पांच बच्चे फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो गए। स्थानीय स्तर पर इलाज करने से जब हालत में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें सीएचसी रानीपुर कोयलसा से जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। शेरवा के मंगल निषाद रविवार की शाम बूढ़नपुर से मुर्गा खरीद कर ले गए थे। रात में परिवार के लोगों ने मीट खाया और जो बचा उसे रख दिया। दूसरे दिन सोमवार को मंगल निषाद के भाई मल्लू व उमेश के बच्चों ने खाया लिया। कुछ देर बाद राकेश (10), प्रेम (7) व हेमंत (4) पुत्र मल्लू और बलवंत (5) व यशवंत (4) पुत्र उमेश को उल्टी व दस्त होनी शुरू हो गई। हालत बिगड़ने लगी तो परिजनों ने स्थानीय चिकित्सकों से इलाज कराया लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार होता नहीं हुआ। सूचना पाकर ग्राम प्रधान सुरेंद्र निषाद पहुंचे और बीमार बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रानीपुर कोयलसा में भर्ती कराया जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जहां इलाज चल रहा है।
इस प्रकरण में डा. आलेंद्र कुमार, प्रभारी चिकित्साधिकारी रानीपुर कोयलसा ने बताया की मुर्गे का बासी मीट खाने से बच्चों को फूड प्वाइजन की शिकायत थी जिनका इलाज कर दिया गया था। बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया। इस समय भीषण गर्मी है। ऐसे में सड़ा-गला फल, किसी भी प्रकार का बासी भोजन करने से फूड प्वाइजनिंग की शिकायत हो सकती है।
इस प्रकरण में डा. आलेंद्र कुमार, प्रभारी चिकित्साधिकारी रानीपुर कोयलसा ने बताया की मुर्गे का बासी मीट खाने से बच्चों को फूड प्वाइजन की शिकायत थी जिनका इलाज कर दिया गया था। बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया। इस समय भीषण गर्मी है। ऐसे में सड़ा-गला फल, किसी भी प्रकार का बासी भोजन करने से फूड प्वाइजनिंग की शिकायत हो सकती है।
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