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सामूहिक विवाह समारोह में दिखा उल्लास का नजारा

कुरीति का समाप्त होना जरूरी: रामसकल
समाजसेवी रामसकल पटेल ने कहा कि आज के समय में दहेज समाज के लिए अभिशाप  बन चुका है। जिसके कारण बेटियों का उत्पीड़न हो रहा है, उन्हें मारा जा रहा है। इस गंदी प्रथा का समाप्त होना जरूरी है। इसी उद्देष्य से उन्होंने 2001 से दहेज रहित विवाह का कार्यक्रम शुरू किया। उन्हें ख़ुशी है कि समाज का प्रत्येक तबका इसमें भागीदारी कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि समाज का बुद्धिजीवी तबका जब ऐसे कार्यक्रमों के प्रति गंभीर होगा तो समाज में बड़ा बदलाव आयेगा। दहेज लोभियों को मुंह की खानी पड़ेगी।

आजमगढ़ :सगड़ी: गोवरधन जनकल्याण समिति उरदिहा आजमगढ के तत्वाधान मे 12वी  सामूहिक दहेज रहित विवाह समारोह  छत्रपति शिवाजी बालिका विद्यालय रोहुवार बैदौली आजमगढ़ के प्रांगण मे संपन्न हुआ।   इस  आयोजन में  156 वर-वधु जोडो ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था।   जिसमे पहुंचे जोड़ों में  4 मुस्लिम, 45बौद्धऔर लगभग 83हिन्दू  जोडे पहुंचे और अपने-अपने धर्म गुरुओं के निर्देशानुसार दाम्पत्य जीवन बंधन में बांध गए।   कार्यक्रम में  हिन्दु गुरू कपिलदेव आर्य,   मु्स्लिम के मौलाना हाफिज तौहिद,  अहमद फलाही और  बौद्ध भिच्छु आर्य  महाअश्विर इस विवाह सम्रारोह में भाग लिए।  समारोह कि अध्य़क्षता रामकुवर वरमा संचालन कल्पनाथ सिह ने किया तथा शिक्षा मंन्त्री बलराम यादव, सगडी बिधायक अभयनरायन सिह पटेल, पूर्व  प्रमुख चन्द्रशेखर यादव  आदि लोग मौजुद थे।  अंत मे विन दहेज रहित विवाह के कर्ताधर्ता  रामशकल सिह पटेल ने सबका धंन्यवाद देते हुए बतायॉ कि अब तक 4504 जोडो की शादी  इस समिति से द्वारा हो चुकी है।
 सामूहिक दहेज रहित विवाह समारोह कार्यक्रम को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहा। दिन निकलने के साथ ही यहां लोग पहुंचना शुरू हो गये थे। पण्डाल में अलग-अलग अग्निकुण्ड बनाये गये थे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पहले सौ जोड़ों का जयमाल कराया गया। इसके बाद सिन्दूरदान, सात फेरे आदि की रस्म पूरी की गयी। वैवाहिक कार्यक्रम मिर्जापुर से आये पंडित कपिलदेव आर्य द्वारा सम्पन्न कराया गया वहीं  मुस्लिम जोड़ों का मौलाना अख्तर द्वारा निकाह कराया गया। इसके बाद लोगों ने भोज का आनन्द उठाया। हजारों की भीड़ ने वर-वधुओं को आशीर्वाद दिया।
वैवाहिक कार्यक्रम की घोषणा के बाद ही सभी जोड़ों के लिए शादी का जोड़ा उनके घर भेज दिया गया था। दूल्हा और दुल्हन उसी जोड़े में विवाह मण्डप में पहुंचे। विवाह सम्पन्न होने के बाद रामसकल पटेल द्वारा सभी नव विवाहितों को उपहार स्वरूप आभूषण, मिठाई आदि प्रदान किया गया।
पण्डाल में सभी जोड़ों के लिए अलग-अलग सीट निर्धारित की गयी थी जिस पर उनका नाम लिखा हुआ था। हर सीट पर रोवर्स-रेंजर्स की ड्यूटी लगायी गयी थी जो लोगों का पूरा ख्याल रख रहे थे।
गौरतलब है की समाजसेवी रामसकल पटेल ने वर्ष 2001 में दहेज रहित विवाह कराने का संकल्प लिया था। तब से यह कार्यक्रम निरंतर चल रहा है। वर्ष 2001 में पहली बार जब यह कार्यक्रम आयोजित हुआ तो 85 विभिन्न जातियों के 501 जोड़ों का विवाह सम्पन्न कराया गया था। यह 12वां सामूहिक विवाह आयोजन रविवार को सम्पन्न हुआ। अब तक 45 सौ जोड़े रामसकल के प्रयास से बिना दहेज दाम्पत्य सूत्र में बंध चुके हैं। रविवार को आयोजित दहेज रहित विवाह में आजमगढ़ के अलावा मऊ, गोरखपुर, बलिया, देवरिया, फैजाबाद, अम्बेडकर नगर जनपद के वर-वधुओं का पंजीकरण हुआ था। सभी का विवाह एक पण्डाल में एक साथ सम्पन्न कराया गया।



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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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