आजमगढ़। ब्लाक प्रमुख चुनाव में कराई शिकस्त से तिलमिलाये सपाई सोमवार को एमएलसी की समीक्षा बैठक में आपस में ही भिड़ गये। आरोप प्रत्यारोप का दौरा शुरू हुआ तो मेंहनगर विधायक ने यहां तक कह डाला कि डीजीपी और आइजी तक को बुलाने के बाद भी चुनाव हारे हैं यदि पुलिस और प्रशासन पर नकेल नहीं लगी तो एमएलसी भी हारेंगे। यहीं नहीं माहौल इस कदर हो गया कि विधायक सहित कुछ लोग बैठक से बाहर निकल गये। यह अलग बात है कि मीडिया के पूछने पर उन्होंने कहीं और जाने का बहाना बना दिया। बता दें कि ब्लाक प्रमुख चुनाव में मात खाये सपाइयों की सोमवार को नेहरू हाल में एमएलसी चुनाव तैयारी की समीक्षा बैठक थी। बैठक में कई मंत्री और विधायक शामिल थे। बैठक के दौरान विधायक बृजलाल सोनकर ने कहाकि पल्हना में प्रशासन की वजह से हारे। दबगों और बाहुबलियों द्वारा वहां खुला तांडव किया गया। पथराव में वे और विधायक सरोज किसी तरह जान बचाकर भागे। विधायक ने हार की जिम्मेदारी प्रशासन पर थोपते हुए कहा कि डीजीपी और आईजी को बुलाने के बाद भी हम बडी मुश्किल से दस सीट जीते है। प्रशासन ने रवैया नहीं बदला और माफियाओं पर शिकंजा नहीं कसा तो एमएलसी चुनाव भी हारेंगे। निर्विरोध निर्वाचन का सपना पूरा नहीं होगा। इसके बाद उर्जा राज्य मंत्री वसीम अहमद ने विरोध किया तो दोनों में बहस हो गई। विधायक का दावा है कि मेरा साथ विधायक श्याम बहादुर यादव ने भी दिया और उनके विचार भी यही थे। तू तू - मैं मैं के बाद विधायक और उनके कुछ समर्थक बैठक अधूरी छोड़कर चले गये। वैसे मीडिया के सामने आते ही विधायक का सुर बदल गया। बैठक बीच में छोड़कर नहीं गये बल्कि उन्हें पोस्टमार्टम हाउस जाना था इसलिए चले गये। इस मामले में सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव का कहना है कि बैठक में एमएलसी चुनाव की रणनीति के लिए आजमगढ़ और मउ के पदाधिकारी और विधायक बैठक में शामिल हुए है। रहा सवाल प्रमुख चुनाव का तो सबसे अधिक सीटे हमने ही जीती है। वहीं भाजपा के पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने कहा कि सत्ता का खुला दुरूपयोग हुआ हैं। 2017 में सपा को अपनी हैसियत समझ में आ जायेगी वह एक सीट के लिए परेशान होगी।

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