मुकाबला बराबर होने पर खुला राज
आजमगढ़। ड्रोन की निगरानी और पुलिस की चाक चैंबंद व्यवस्था को दरकिनार कर हत्या के मामले में फरार चल रहा आरोपी बीडीसी रविवार को पल्हना ब्लाक पहुंचा और वोट देकर चला गया लेकिन किसी को भनक भी नहीं लगी। घटना के बाद से उसकी तलाश में जुटी पुलिस को इस बात की भनक तक नहीं लग सकी वहीं प्रमुख पद के लिए चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी उसे अपना समर्थक जान चुप रहने में ही अपनी भलाई समझे। बात तो तब खुली जब पल्हना ब्लाक पर मतगणना के दौरान दोनों प्रत्याशियों को बराबर वोट मिले और वहां लाटरी के माध्यम से निर्दल प्रत्याशी को प्रमुख पद पर निर्वाचित किया गया।
गौरतलब है कि मेंहनगर थाना क्षेत्र के असौसा गांव में चुनावी रंजिश के चलते बीते 22 दिसम्बर की सुबह असौसा गांव के निर्वाचित प्रधान के चचेरे भाई व पेशे से ठेकेदार राजेश उर्फ पिन्टू यादव की गोली मार कर हत्या कर दी गई। इस मामले में मृतक पक्ष की ओर गांव के पूर्व प्रधान व वर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य महेन्द्र यादव सहित चार लोगों को नामजद किया गया था। घटना के बाद से ही आरोपी बीडीसी महेन्द्र यादव फरार चल रहा है। ब्लाक प्रमुख चुनाव में भाग्य आजमा रहे दोनों प्रत्याशी उसके समर्थन को लेकर आश्वस्त थे। इसी कारण वे मतदान के समय चुप रहे और जब मतगणना परिणाम मिला तो दोनों वोटों की बराबरी के लिए उसे जिम्मेदार बताने लगे। हालांकि चर्चा है कि वह सत्ताधारी दल की गाडी में सवार होकर मतदान को पहुंचा था। खैर जो भी हो देखना है कि कानून का शिकंजा उस आरोपी पर कब तक कस पाता है।
आजमगढ़। ड्रोन की निगरानी और पुलिस की चाक चैंबंद व्यवस्था को दरकिनार कर हत्या के मामले में फरार चल रहा आरोपी बीडीसी रविवार को पल्हना ब्लाक पहुंचा और वोट देकर चला गया लेकिन किसी को भनक भी नहीं लगी। घटना के बाद से उसकी तलाश में जुटी पुलिस को इस बात की भनक तक नहीं लग सकी वहीं प्रमुख पद के लिए चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी उसे अपना समर्थक जान चुप रहने में ही अपनी भलाई समझे। बात तो तब खुली जब पल्हना ब्लाक पर मतगणना के दौरान दोनों प्रत्याशियों को बराबर वोट मिले और वहां लाटरी के माध्यम से निर्दल प्रत्याशी को प्रमुख पद पर निर्वाचित किया गया।
गौरतलब है कि मेंहनगर थाना क्षेत्र के असौसा गांव में चुनावी रंजिश के चलते बीते 22 दिसम्बर की सुबह असौसा गांव के निर्वाचित प्रधान के चचेरे भाई व पेशे से ठेकेदार राजेश उर्फ पिन्टू यादव की गोली मार कर हत्या कर दी गई। इस मामले में मृतक पक्ष की ओर गांव के पूर्व प्रधान व वर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य महेन्द्र यादव सहित चार लोगों को नामजद किया गया था। घटना के बाद से ही आरोपी बीडीसी महेन्द्र यादव फरार चल रहा है। ब्लाक प्रमुख चुनाव में भाग्य आजमा रहे दोनों प्रत्याशी उसके समर्थन को लेकर आश्वस्त थे। इसी कारण वे मतदान के समय चुप रहे और जब मतगणना परिणाम मिला तो दोनों वोटों की बराबरी के लिए उसे जिम्मेदार बताने लगे। हालांकि चर्चा है कि वह सत्ताधारी दल की गाडी में सवार होकर मतदान को पहुंचा था। खैर जो भी हो देखना है कि कानून का शिकंजा उस आरोपी पर कब तक कस पाता है।

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