डीएम को देख उत्साहित हुए बच्चे, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की मिली प्रेरणा
आजमगढ़: शिक्षक दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने प्राथमिक विद्यालय भोरमऊ, फूलपुर का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षक की भूमिका में बच्चों से आत्मीय संवाद किया और उनकी शैक्षिक समझ एवं ज्ञान क्षमता को परखा। जिलाधिकारी ने छात्र-छात्राओं से किताबें पढ़वाने के साथ विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे। विद्यालय की दीवारों पर लिखी कविताओं और कहानियों को बच्चों से पढ़वाकर उनसे संबंधित सवाल भी किए। उन्होंने बच्चों की समझ और उत्तर देने के आत्मविश्वास की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर सीखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। शिक्षक दिवस के महत्व की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने बच्चों को भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और योगदान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उनकी जयंती के अवसर पर प्रत्येक वर्ष 05 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बच्चों को शिक्षकों के महत्व और शिक्षा के माध्यम से जीवन में सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय की दीवारों पर बनाए गए सौरमंडल का अवलोकन करते हुए जिलाधिकारी ने बच्चों से विभिन्न ग्रहों और उपग्रहों के बारे में सवाल किए तथा उन्हें सौरमंडल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। इस दौरान डीएम बच्चों के बीच सहज वातावरण में शिक्षक की भूमिका में नजर आए। निरीक्षण के दौरान छात्र-छात्राएं मध्यान्ह भोजन कर रहे थे। जिलाधिकारी ने बच्चों के बीच पहुंचकर भोजन की गुणवत्ता, स्वाद और नियमित उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने विद्यालय के रसोईघर का निरीक्षण कर तैयार भोजन की गुणवत्ता तथा भोजन तैयार करने और रखने की व्यवस्था देखी। जिलाधिकारी ने विद्यालय परिसर और रसोईघर में साफ-सफाई बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित मेन्यू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण, पौष्टिक एवं स्वच्छ मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विद्यालय में उपलब्ध शिक्षण सामग्री एवं शैक्षणिक संसाधनों का विद्यार्थियों के हित में प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्वच्छता, पेयजल, शौचालय सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त रखने पर जोर दिया। जिलाधिकारी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उनकी रुचि, प्रतिभा और क्षमता के अनुरूप सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। बच्चों को लगातार प्रोत्साहित किया जाए, ताकि वे अपनी प्रतिभा को पहचानकर आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बच्चों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। विद्यालयों का नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति का सत्यापन किया जाएगा और कमियां मिलने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा।
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