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आजमगढ़: विधायक आलमबदी आज़मी को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, उमड़ा जनसैलाब





जामेतुर्रशाद कब्रिस्तान में पूरे सम्मान के साथ सुपुर्द ए खाक किया गया

आजमगढ़: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं निजामाबाद से पांच बार विधायक रहे आलमबदी आज़मी को गुरुवार शाम हजारों नम आंखों के बीच अंतिम विदाई दी गई। उनके कुर्मी टोला स्थित आवास से निकली अंतिम यात्रा में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। खराब मौसम भी लोगों के श्रद्धा भाव को रोक नहीं सका। अंतिम यात्रा मुकेरीगंज स्थित जामेतुर्रशाद कब्रिस्तान पहुंची, जहां उन्हें पूरे सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
92 वर्षीय आलमबदी आज़मी का बुधवार देर रात उनके कुर्मी टोला स्थित आवास पर निधन हो गया था। वह लंबे समय से अस्वस्थ थे। लखनऊ में उपचार के बाद उन्हें घर लाया गया था, जहां चिकित्सकीय देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। देर रात तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे आजमगढ़ समेत पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। गुरुवार दोपहर बाद निकली अंतिम यात्रा में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव, विधायक दुर्गा प्रसाद यादव, संग्राम यादव और नफीस अहमद, विधान परिषद सदस्य बलराम यादव, पूर्व मंत्री चंद्रदेव राम यादव सहित पार्टी के अनेक नेता, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की। बड़ी संख्या में आम नागरिक भी अपने प्रिय जननेता के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। आलमबदी आज़मी की पहचान एक सादगीपूर्ण जनप्रतिनिधि के रूप में रही। विधायक बनने के बाद भी उन्होंने कभी दिखावे की राजनीति नहीं की। कुर्मी टोला स्थित उनका साधारण आवास हमेशा आम लोगों के लिए खुला रहता था। वे अक्सर साधारण कुर्ता-पायजामा और हवाई चप्पल में नजर आते थे। बिना तामझाम के रहन-सहन और लोगों के बीच सहज उपलब्ध रहने की उनकी शैली ने उन्हें सभी राजनीतिक दलों में सम्मान दिलाया। 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ के बिंदवल गांव में जन्मे आलमबदी आज़मी ने इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था। राजनीति में सक्रिय होने से पहले उनका तकनीकी क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा। वर्ष 1989 में उन्होंने आजमगढ़ लोकसभा सीट से मुस्लिम लीग के टिकट पर चुनाव लड़कर राजनीतिक सफर की शुरुआत की। इसके बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और 1996 में पहली बार निजामाबाद विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। वर्ष 2002 में दोबारा जीत दर्ज की। 2007 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन चुनाव जीतकर उन्होंने कुल पांच बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया।
आलमबदी आज़मी के निधन से आजमगढ़ की राजनीति ने एक ऐसे जननेता को खो दिया, जिसकी पहचान पद और प्रभाव से अधिक सादगी, ईमानदारी और जनता से गहरे जुड़ाव के लिए थी। अंतिम यात्रा में उमड़ी अभूतपूर्व भीड़ उनके प्रति लोगों के सम्मान और स्नेह की गवाही देती रही।

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रिपोर्ट आज़मगढ़ लाइव

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